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वस्त्र धारण तथा भविष्य
समान्यतः वस्त्र सुन्दर एवं आकर्षक दिखने एवं अपने व्यक्तित्व को प्रभावशाली दिखाने हेतु धारण किए जाते हैं। रंग, आकृति एवं स्वरुप की दृष्टि से प्रत्येक व्यक्ति की पसन्द भिन्न-भिन्न हो सकती है। ज्योतिष शास्त्र मेम क्रमशः देव, मनुष्य एवं राक्षस गण होते हैं। इसके अतिरिक्त वास्तु शास्त्र में आठ दिशाओं तथा ब्रह्मस्थल का विशेष महत्त्व होता है। इसी प्रकार वस्त्र में उक्त आठ दिशाओं एवं ब्रह्मस्थल के आधार पर तीनों गणों का निवास होता है। इस तीनों गणों के निवास स्थान को निर्धारित करने हेतु सर्वप्रथम वस्त्र को नौ समान भागों में विभाजित किया जाना चाहिए। वस्त्र की चारों कोण-दिशाओं (ईशान, आग्नेय, नैऋत्य तथा वायव्य) में देवता का निवास मानें तथा पूर्व-पश्चिम एवं ब्रह्मस्थल में राक्षस का तथा उत्तर एवं दक्षिण दिशा में मनुष्य का निवास मानें।
उपर्युक्त आधार एवं अन्य सामान्य आधार पर वस्त्र धारण से सम्बन्धित शुभाशुभ फलों का वर्णन किया जाता है।
॰ यदि नवीन वस्त्र धारण किया जाए तथा उसके कुछ समय उपरान्त ही यदि स्याही, कीचड़, गोबर आदि से वस्त्र गन्दा हो जाए, तो ऐसे व्यक्ति को अनिष्ट की आशंका रहती है। जिस कार्य हेतु नवीन वस्त्र धारण किया गया हो, वह निष्फल हो जाता है।
॰ यदि नवीन वस्त्र धारण के उपरान्त गोदुग्ध, मधु, केसर, चणदन आदि का दाग लग जाए, तो इसे शुभ एवं अनुकूल माना गया है।
॰ यदि नवीन वस्त्र धारण के एक या दो दिन उपरान्त या कुछ घंटों उपरान्त किसी भी कारणवश फट जाए, तो वस्त्रधारक हेतु अशुभ संकेत समझना चाहिए।
॰ यदि नवीन वस्त्र धारण के उपरान्त वस्त्र राक्षस भागों पर से कट या फट जाए, तो वस्त्रधारक को रोगादि कारणों से मृत्युतुल्य कष्ट की आशंका रहती है।
॰ यदि नवीन वस्त्र धारण के उपरान्त मनुष्य भागों से कट या फट जाए, तो वस्त्रधारक को शीघ्र ही पुत्रसुख प्राप्त होता है तथा वैभवशाली पदार्थों की प्राप्ति होती है।
॰ यदि नवीन वस्त्र धारण के उपरान्त देवता-दिशाओं (ईशान, आग्नेय, नैऋत्य तथा वायव्य) में कट या फट जाए, तो वस्त्रधारक को धन, ऐश्वर्य, वैभव, सम्मान एवं भोगों की प्राप्ति होती है। किन्तु यदि फटने की आकृति मांसाहारी काग, कबूतर, उल्लू, मेंढक, गधा, ऊँट, सर्प आदि के समान हो तो वस्त्रधारक को मृत्युतुल्य कष्ट की आशंका रहती है तथा धननाश भी संभव है।
॰ यदि वस्त्र धारण के उपरान्त मनुष्य एवं राक्षस भाग से कट या फट जाए तथा उपर्युक्त वर्णित आकृतियों का निर्माण हो, तो वस्त्रधारक को अनेक प्रकार की व्याधियों से पीड़ा मिलती है तथा अपमान व तिरस्कार सहन करना पड़ता है।
॰ यदि वस्त्र धारण के उपरान्त तीनों भागों देवता, मनुष्य तथा राक्षस से फट जाए, तो वस्त्रधारक को अत्यधिक अनिष्ट का सामना करना पड़ता है।
॰ यदि वस्त्र धारण के उपरान्त राक्षस भाग से फट जाए तथा छत्र, ध्वज, स्वस्तिक, बिल्वफल, बेल, कलश, कमल या तोरण आदि आकृति बने तो वस्त्रधारक को लक्ष्मी प्राप्ति, पद वृद्धि, सम्मान और अन्य सभी प्रकार के अभीष्ट फल प्राप्त होते हैं।
॰ यदि वस्त्र धारण करते समय वस्त्र का दाहिना भाग जल जाए या फट जाए, तो वस्त्रधारक को शारीरिक पीड़ाओं का अनुभव होता है।
॰ यदि वस्त्र धारण करते समय वस्त्र का बाएँ भाग से जल जाए या फट जाए, तो वस्त्रधारक को किसी आत्मीयजन को मृत्युतुल्य कष्ट की आशंका रहती है तथा अत्यधिक मानसिक कष्ट उठाना पड़ता है।
॰ यदि वस्त्र धारण करते समय वस्त्र मध्य भाग से जल जाए या फट जाए, तो वस्त्रधारक को शारीरिक कष्ट, धननाश तथा अपमान की आशंका रहती है।
नवीन वस्त्र धारण मुहूर्तः-
हस्त, चित्रा, स्वाती, विशाखा, अनुराधा, अश्विनी, धनिष्ठा तथा रेवती नक्षत्र, गुरुवार, शुक्रवार तथा बुधवार ये दिन एवं वृष, मिथुन, कन्या और मीन लग्न स्त्रियों के लिए नवीन वस्त्रधारण करने के लिए शुभ हैं। पुरुषों को नवीन वस्त्र धारण हेतु उक्त नक्षत्रों के अतिरिक्त पुनर्वसु, पुष्य, रोहिणी तथा तीनों उत्तरा नक्षत्र भी शुभ माने गये हैं।
नक्षत्रानुसार वस्त्रधारण के फलः-
॰ यदि व्यक्ति अश्विनी, पुष्य, उत्तरा-फाल्गुनी, चित्रा, धनिष्ठा, उत्तराभाद्रपद एवं रेवती नक्षत्रों में वस्त्र धारण करता है, तो ऐसे व्यक्तियों को शुभ एवं अनुजूल फलों की प्राप्ति होती है। धनार्जन हेतु उक्त नक्षत्रों में वस्त्र धारण करना शुभ एवं अनुकूल फलदायक होता है
॰ यदि व्यक्ति रोहिणी, पुनर्वसु, हस्त नक्षत्र में नवीन वस्त्र धारण करता है, तो उसे अपने कार्यक्षेत्र में सफलता एवं उन्नति प्राप्त होती है। किसी विशेष प्रयोजन हेतु यदि वस्त्र धारण किया गया हो, तो प्रयोजन अवश्य सिद्ध होता है।
॰ यदि व्यक्ति विशाखा एवं अनुराधा नक्षत्रों में नवीन वस्त्र धारण करता है, तो उसको समाज एवं राज्य क्षेत्र में प्रतिष्ठा एवं सम्मान प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त प्रेम प्रसंगों में प्रगाढ़ता आती है।
॰ यदि व्यक्ति उत्तराषाढ़ा एवं स्वाती नक्षत्र में नवीन वस्त्र धारण करता है, तो ऐसे व्यक्तियों का समय आमोद-प्रमोद में व्यतीत होता है तथा मनोरंजक यात्राओं के अवसर प्राप्त होते हैं, जिनमें इनको उत्तम भोजन एवं मित्रों की प्राप्ति होती है।
॰ यदि व्यक्ति भरणी, कृत्तिका, ज्येष्ठा, आश्लेषा, मूल आदि में नवीन वस्त्र धारण करता है, तो धारण किया गया वस्त्र आकस्मिक रुप से नष्ट हो जाता है।
॰ यदि व्यक्ति आर्द्रा, मघा एवं शतभिषा में नवीन वस्त्र धारण करता है, तो जल, विष से भय रहता है और रोगादि कारणों से मृत्युतुल्य कष्ट पाता है।
॰ यदि व्यक्ति मृगशिरा, पूर्वाफल्गुनी एवं पूर्वाभाद्रपद में नवीन वस्त्र धारण करता है, तो जल, विषैले एवं हिंसक जीवों से कष्ट मिलता है, राज्यपक्ष से दण्ड एवं हानि की आशंका रहती है।
॰ यदि व्यक्ति पूर्वाषाढ़ा या श्रवण में नवीन वस्त्र धारण करता है, तो शारीरिक रोगों से कष्ट होता है।
॰ वैधृति और सब योग जिनके पीछे `पात’ आता हो या तिथि 4, 9, 14 या फिर अमावस हो, तो उस दिन नया वस्त्र पहनना शुभ नहीं होगा। आमतौर पर नया वस्त्र शुक्रवार को पहनना अति शुभ होता है। इसके अलावा रविवार व बृहस्पतिवार को नए वस्त्र धारण करना शुभ होता है, सोमवार को मध्यम शुभ होता है किन्तु मंगल या शनिवार को नया वस्त्र पहनना अशुभता का सूचक है। यदि वस्त्र हैंडलूम का है और बुनकर या चरखे से बना है, तो इसे शुक्र, गुरु, सोम और रविवार को पहनना चाहिए। यदि अश्विनी, पुष्य, कृतिका, पुनर्वसु, मृगशिरा, रेवती, चित्रा, अनुराधा व ज्येष्ठा नक्षत्रों में यही दिन पड़ें तो और भी शुभ होगा। हैंडलूम का कपड़ा या वस्त्र यदि शादी आदि शुभ अवसरों पर पहनना हो, तो उसे एक बार धोकर ही पहनना शुभ होता है।
यदि आपके वस्त्रों का रंग सफेद है तो शुक्र, गुरु, बुधवार को निम्न नक्षत्र देख कर पहनें। हस्त, अश्विनी, पुष्य, रोहिणी, उत्तरा वाले सभी नक्षत्र, चित्रा, स्वाति, विशाखा, धनिष्ठा, पुनर्वसु व रेवती। स्त्री हो या पुरुष, इन नक्षत्रों में सफेद वस्त्र पहनकर अपने लिए प्रकृति से शुभता ग्रहण करते हैं।
लाल रंग का वस्त्र गुरु, शुक्र व मंगलवार को अश्विनी, धनिष्ठा, हस्त, चित्रा, विशाखा और अनुराधा नक्षत्र हो तो पहनना शुभ होता है। पीले रंग का वस्त्र रोहिणी, तीनों उत्तरा नाम के नक्षत्र, हस्त, अश्विनी, पुष्य, विशाखा, अनुराधा, रेवती, धनिष्ठा, चित्रा और पुष्य नक्षत्रों में बुध, गुरु या रविवार को पहनना शुभकारक होता है। यदि पीले व लाल रंग का मिश्रण हो, तो भी इन्हीं नक्षत्रों व वारों में पहना जा सकता है। नीले वस्त्र धारण करने के लिए शनि और रविवार का दिन उपयुक्त माना गया है। इन दिनों में नक्षत्र पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, धनिष्ठा, हस्त, चित्रा, स्वाति विशाखा, पुनर्वसु, भरणी हो, तो नीला वस्त्र धारण करना शुभ होगा।
ऊनी वस्त्र केवल रवि, शुक्र और शनिवारों को हस्त, चित्रा, स्वाती विशाखा, धनिष्ठा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, पूर्वा व उत्तराषाढ़, पूर्वा व उत्तराभाद्रपद, पुनर्वसु, पुष्य, अश्विनी और रेवती नक्षत्रों को पहनना श्रेयस्कर होता है। महिलाओं को खास तौर पर उपरोक्त शुभ अवसरों व नक्षत्रों के साथ-साथ, नए वस्त्र धारण करने के समय उदित लग्न का भी ध्यान रखना चाहिए जैसे मेष, कर्क, तुला, मकर, धनु, कन्या के मीन लग्न हों, तो नए वस्त्र पहनने से उनके तेज का विस्तार होगा और कांति में वृद्धि होगी।
अश्विनी नक्षत्र में नए वस्त्र धारण करने से और नए वस्त्रों की प्राप्ति होती है। रोहिणी में धन की प्राप्ति होती है। पुनर्वसु में पहना वस्त्र हर तरह से शुभ का प्रतीक होता है। पुष्य व उत्तराफाल्गुनी में धन लाभ होता है। हस्त नक्षत्रों में पहने वस्त्र आपके कार्य सिद्ध करता है। स्वाति में उत्तम भोजन की प्राप्ति होती है। विशाखा में नवीन वस्त्र पहनने से प्रियजनों को प्यार-दुलार प्राप्त होता है। अनुराधा में मित्रों से समागम का लाभ होता है। उत्तराषाढ़ में मिष्ठान्न व भोजन प्राप्त होता है। धनिष्ठा में पहना वस्त्र घर के अन्न की वृद्धि करता है, उत्तरा भाद्रपद में पुत्रलाभ होता है और रेवती नक्षत्र में नवीन वस्त्र पहनने से रत्नों की प्राप्ति होती है।
वस्त्र धारण तथा भविष्य
समान्यतः वस्त्र सुन्दर एवं आकर्षक दिखने एवं अपने व्यक्तित्व को प्रभावशाली दिखाने हेतु धारण किए जाते हैं। रंग, आकृति एवं स्वरुप की दृष्टि से प्रत्येक व्यक्ति की पसन्द भिन्न-भिन्न हो सकती है। ज्योतिष शास्त्र मेम क्रमशः देव, मनुष्य एवं राक्षस गण होते हैं। इसके अतिरिक्त वास्तु शास्त्र में आठ दिशाओं तथा ब्रह्मस्थल का विशेष महत्त्व होता है। इसी प्रकार वस्त्र में उक्त आठ दिशाओं एवं ब्रह्मस्थल के आधार पर तीनों गणों का निवास होता है। इस तीनों गणों के निवास स्थान को निर्धारित करने हेतु सर्वप्रथम वस्त्र को नौ समान भागों में विभाजित किया जाना चाहिए। वस्त्र की चारों कोण-दिशाओं (ईशान, आग्नेय, नैऋत्य तथा वायव्य) में देवता का निवास मानें तथा पूर्व-पश्चिम एवं ब्रह्मस्थल में राक्षस का तथा उत्तर एवं दक्षिण दिशा में मनुष्य का निवास मानें।
उपर्युक्त आधार एवं अन्य सामान्य आधार पर वस्त्र धारण से सम्बन्धित शुभाशुभ फलों का वर्णन किया जाता है।
॰ यदि नवीन वस्त्र धारण किया जाए तथा उसके कुछ समय उपरान्त ही यदि स्याही, कीचड़, गोबर आदि से वस्त्र गन्दा हो जाए, तो ऐसे व्यक्ति को अनिष्ट की आशंका रहती है। जिस कार्य हेतु नवीन वस्त्र धारण किया गया हो, वह निष्फल हो जाता है।
॰ यदि नवीन वस्त्र धारण के उपरान्त गोदुग्ध, मधु, केसर, चणदन आदि का दाग लग जाए, तो इसे शुभ एवं अनुकूल माना गया है।
॰ यदि नवीन वस्त्र धारण के एक या दो दिन उपरान्त या कुछ घंटों उपरान्त किसी भी कारणवश फट जाए, तो वस्त्रधारक हेतु अशुभ संकेत समझना चाहिए।
॰ यदि नवीन वस्त्र धारण के उपरान्त वस्त्र राक्षस भागों पर से कट या फट जाए, तो वस्त्रधारक को रोगादि कारणों से मृत्युतुल्य कष्ट की आशंका रहती है।
॰ यदि नवीन वस्त्र धारण के उपरान्त मनुष्य भागों से कट या फट जाए, तो वस्त्रधारक को शीघ्र ही पुत्रसुख प्राप्त होता है तथा वैभवशाली पदार्थों की प्राप्ति होती है।
॰ यदि नवीन वस्त्र धारण के उपरान्त देवता-दिशाओं (ईशान, आग्नेय, नैऋत्य तथा वायव्य) में कट या फट जाए, तो वस्त्रधारक को धन, ऐश्वर्य, वैभव, सम्मान एवं भोगों की प्राप्ति होती है। किन्तु यदि फटने की आकृति मांसाहारी काग, कबूतर, उल्लू, मेंढक, गधा, ऊँट, सर्प आदि के समान हो तो वस्त्रधारक को मृत्युतुल्य कष्ट की आशंका रहती है तथा धननाश भी संभव है।
॰ यदि वस्त्र धारण के उपरान्त मनुष्य एवं राक्षस भाग से कट या फट जाए तथा उपर्युक्त वर्णित आकृतियों का निर्माण हो, तो वस्त्रधारक को अनेक प्रकार की व्याधियों से पीड़ा मिलती है तथा अपमान व तिरस्कार सहन करना पड़ता है।
॰ यदि वस्त्र धारण के उपरान्त तीनों भागों देवता, मनुष्य तथा राक्षस से फट जाए, तो वस्त्रधारक को अत्यधिक अनिष्ट का सामना करना पड़ता है।
॰ यदि वस्त्र धारण के उपरान्त राक्षस भाग से फट जाए तथा छत्र, ध्वज, स्वस्तिक, बिल्वफल, बेल, कलश, कमल या तोरण आदि आकृति बने तो वस्त्रधारक को लक्ष्मी प्राप्ति, पद वृद्धि, सम्मान और अन्य सभी प्रकार के अभीष्ट फल प्राप्त होते हैं।
॰ यदि वस्त्र धारण करते समय वस्त्र का दाहिना भाग जल जाए या फट जाए, तो वस्त्रधारक को शारीरिक पीड़ाओं का अनुभव होता है।
॰ यदि वस्त्र धारण करते समय वस्त्र का बाएँ भाग से जल जाए या फट जाए, तो वस्त्रधारक को किसी आत्मीयजन को मृत्युतुल्य कष्ट की आशंका रहती है तथा अत्यधिक मानसिक कष्ट उठाना पड़ता है।
॰ यदि वस्त्र धारण करते समय वस्त्र मध्य भाग से जल जाए या फट जाए, तो वस्त्रधारक को शारीरिक कष्ट, धननाश तथा अपमान की आशंका रहती है।
नवीन वस्त्र धारण मुहूर्तः-
हस्त, चित्रा, स्वाती, विशाखा, अनुराधा, अश्विनी, धनिष्ठा तथा रेवती नक्षत्र, गुरुवार, शुक्रवार तथा बुधवार ये दिन एवं वृष, मिथुन, कन्या और मीन लग्न स्त्रियों के लिए नवीन वस्त्रधारण करने के लिए शुभ हैं। पुरुषों को नवीन वस्त्र धारण हेतु उक्त नक्षत्रों के अतिरिक्त पुनर्वसु, पुष्य, रोहिणी तथा तीनों उत्तरा नक्षत्र भी शुभ माने गये हैं।
नक्षत्रानुसार वस्त्रधारण के फलः-
॰ यदि व्यक्ति अश्विनी, पुष्य, उत्तरा-फाल्गुनी, चित्रा, धनिष्ठा, उत्तराभाद्रपद एवं रेवती नक्षत्रों में वस्त्र धारण करता है, तो ऐसे व्यक्तियों को शुभ एवं अनुजूल फलों की प्राप्ति होती है। धनार्जन हेतु उक्त नक्षत्रों में वस्त्र धारण करना शुभ एवं अनुकूल फलदायक होता है
॰ यदि व्यक्ति रोहिणी, पुनर्वसु, हस्त नक्षत्र में नवीन वस्त्र धारण करता है, तो उसे अपने कार्यक्षेत्र में सफलता एवं उन्नति प्राप्त होती है। किसी विशेष प्रयोजन हेतु यदि वस्त्र धारण किया गया हो, तो प्रयोजन अवश्य सिद्ध होता है।
॰ यदि व्यक्ति विशाखा एवं अनुराधा नक्षत्रों में नवीन वस्त्र धारण करता है, तो उसको समाज एवं राज्य क्षेत्र में प्रतिष्ठा एवं सम्मान प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त प्रेम प्रसंगों में प्रगाढ़ता आती है।
॰ यदि व्यक्ति उत्तराषाढ़ा एवं स्वाती नक्षत्र में नवीन वस्त्र धारण करता है, तो ऐसे व्यक्तियों का समय आमोद-प्रमोद में व्यतीत होता है तथा मनोरंजक यात्राओं के अवसर प्राप्त होते हैं, जिनमें इनको उत्तम भोजन एवं मित्रों की प्राप्ति होती है।
॰ यदि व्यक्ति भरणी, कृत्तिका, ज्येष्ठा, आश्लेषा, मूल आदि में नवीन वस्त्र धारण करता है, तो धारण किया गया वस्त्र आकस्मिक रुप से नष्ट हो जाता है।
॰ यदि व्यक्ति आर्द्रा, मघा एवं शतभिषा में नवीन वस्त्र धारण करता है, तो जल, विष से भय रहता है और रोगादि कारणों से मृत्युतुल्य कष्ट पाता है।
॰ यदि व्यक्ति मृगशिरा, पूर्वाफल्गुनी एवं पूर्वाभाद्रपद में नवीन वस्त्र धारण करता है, तो जल, विषैले एवं हिंसक जीवों से कष्ट मिलता है, राज्यपक्ष से दण्ड एवं हानि की आशंका रहती है।
॰ यदि व्यक्ति पूर्वाषाढ़ा या श्रवण में नवीन वस्त्र धारण करता है, तो शारीरिक रोगों से कष्ट होता है।
॰ वैधृति और सब योग जिनके पीछे `पात’ आता हो या तिथि 4, 9, 14 या फिर अमावस हो, तो उस दिन नया वस्त्र पहनना शुभ नहीं होगा। आमतौर पर नया वस्त्र शुक्रवार को पहनना अति शुभ होता है। इसके अलावा रविवार व बृहस्पतिवार को नए वस्त्र धारण करना शुभ होता है, सोमवार को मध्यम शुभ होता है किन्तु मंगल या शनिवार को नया वस्त्र पहनना अशुभता का सूचक है। यदि वस्त्र हैंडलूम का है और बुनकर या चरखे से बना है, तो इसे शुक्र, गुरु, सोम और रविवार को पहनना चाहिए। यदि अश्विनी, पुष्य, कृतिका, पुनर्वसु, मृगशिरा, रेवती, चित्रा, अनुराधा व ज्येष्ठा नक्षत्रों में यही दिन पड़ें तो और भी शुभ होगा। हैंडलूम का कपड़ा या वस्त्र यदि शादी आदि शुभ अवसरों पर पहनना हो, तो उसे एक बार धोकर ही पहनना शुभ होता है।
यदि आपके वस्त्रों का रंग सफेद है तो शुक्र, गुरु, बुधवार को निम्न नक्षत्र देख कर पहनें। हस्त, अश्विनी, पुष्य, रोहिणी, उत्तरा वाले सभी नक्षत्र, चित्रा, स्वाति, विशाखा, धनिष्ठा, पुनर्वसु व रेवती। स्त्री हो या पुरुष, इन नक्षत्रों में सफेद वस्त्र पहनकर अपने लिए प्रकृति से शुभता ग्रहण करते हैं।
लाल रंग का वस्त्र गुरु, शुक्र व मंगलवार को अश्विनी, धनिष्ठा, हस्त, चित्रा, विशाखा और अनुराधा नक्षत्र हो तो पहनना शुभ होता है। पीले रंग का वस्त्र रोहिणी, तीनों उत्तरा नाम के नक्षत्र, हस्त, अश्विनी, पुष्य, विशाखा, अनुराधा, रेवती, धनिष्ठा, चित्रा और पुष्य नक्षत्रों में बुध, गुरु या रविवार को पहनना शुभकारक होता है। यदि पीले व लाल रंग का मिश्रण हो, तो भी इन्हीं नक्षत्रों व वारों में पहना जा सकता है। नीले वस्त्र धारण करने के लिए शनि और रविवार का दिन उपयुक्त माना गया है। इन दिनों में नक्षत्र पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, धनिष्ठा, हस्त, चित्रा, स्वाति विशाखा, पुनर्वसु, भरणी हो, तो नीला वस्त्र धारण करना शुभ होगा।
ऊनी वस्त्र केवल रवि, शुक्र और शनिवारों को हस्त, चित्रा, स्वाती विशाखा, धनिष्ठा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, पूर्वा व उत्तराषाढ़, पूर्वा व उत्तराभाद्रपद, पुनर्वसु, पुष्य, अश्विनी और रेवती नक्षत्रों को पहनना श्रेयस्कर होता है। महिलाओं को खास तौर पर उपरोक्त शुभ अवसरों व नक्षत्रों के साथ-साथ, नए वस्त्र धारण करने के समय उदित लग्न का भी ध्यान रखना चाहिए जैसे मेष, कर्क, तुला, मकर, धनु, कन्या के मीन लग्न हों, तो नए वस्त्र पहनने से उनके तेज का विस्तार होगा और कांति में वृद्धि होगी।
अश्विनी नक्षत्र में नए वस्त्र धारण करने से और नए वस्त्रों की प्राप्ति होती है। रोहिणी में धन की प्राप्ति होती है। पुनर्वसु में पहना वस्त्र हर तरह से शुभ का प्रतीक होता है। पुष्य व उत्तराफाल्गुनी में धन लाभ होता है। हस्त नक्षत्रों में पहने वस्त्र आपके कार्य सिद्ध करता है। स्वाति में उत्तम भोजन की प्राप्ति होती है। विशाखा में नवीन वस्त्र पहनने से प्रियजनों को प्यार-दुलार प्राप्त होता है। अनुराधा में मित्रों से समागम का लाभ होता है। उत्तराषाढ़ में मिष्ठान्न व भोजन प्राप्त होता है। धनिष्ठा में पहना वस्त्र घर के अन्न की वृद्धि करता है, उत्तरा भाद्रपद में पुत्रलाभ होता है और रेवती नक्षत्र में नवीन वस्त्र पहनने से रत्नों की प्राप्ति होती है।
ग्रह पीड़ा निवारक टोटके-
सूर्य
१॰ सूर्य को बली बनाने के लिए व्यक्ति को प्रातःकाल सूर्योदय के समय उठकर लाल पूष्प वाले पौधों एवं वृक्षों को जल से सींचना चाहिए।
२॰ रात्रि में ताँबे के पात्र में जल भरकर सिरहाने रख दें तथा दूसरे दिन प्रातःकाल उसे पीना चाहिए।
३॰ ताँबे का कड़ा दाहिने हाथ में धारण किया जा सकता है।
४॰ लाल गाय को रविवार के दिन दोपहर के समय दोनों हाथों में गेहूँ भरकर खिलाने चाहिए। गेहूँ को जमीन पर नहीं डालना चाहिए।
५॰ किसी भी महत्त्वपूर्ण कार्य पर जाते समय घर से मीठी वस्तु खाकर निकलना चाहिए।
६॰ हाथ में मोली (कलावा) छः बार लपेटकर बाँधना चाहिए।
७॰ लाल चन्दन को घिसकर स्नान के जल में डालना चाहिए।
सूर्य के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु रविवार का दिन, सूर्य के नक्षत्र (कृत्तिका, उत्तरा-फाल्गुनी तथा उत्तराषाढ़ा) तथा सूर्य की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
चन्द्रमा
१॰ व्यक्ति को देर रात्रि तक नहीं जागना चाहिए। रात्रि के समय घूमने-फिरने तथा यात्रा से बचना चाहिए।
२॰ रात्रि में ऐसे स्थान पर सोना चाहिए जहाँ पर चन्द्रमा की रोशनी आती हो।
३॰ ऐसे व्यक्ति के घर में दूषित जल का संग्रह नहीं होना चाहिए।
४॰ वर्षा का पानी काँच की बोतल में भरकर घर में रखना चाहिए।
५॰ वर्ष में एक बार किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान अवश्य करना चाहिए।
६॰ सोमवार के दिन मीठा दूध नहीं पूना चाहिए।
७॰ सफेद सुगंधित पुष्प वाले पौधे घर में लगाकर उनकी देखभाल करनी चाहिए।
चन्द्रमा के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु सोमवार का दिन, चन्द्रमा के नक्षत्र (रोहिणी, हस्त तथा श्रवण) तथा चन्द्रमा की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
मंगल
१॰ लाल कपड़े में सौंफ बाँधकर अपने शयनकक्ष में रखनी चाहिए।
२॰ ऐसा व्यक्ति जब भी अपना घर बनवाये तो उसे घर में लाल पत्थर अवश्य लगवाना चाहिए।
३॰ बन्धुजनों को मिष्ठान्न का सेवन कराने से भी मंगल शुभ बनता है।
४॰ लाल वस्त्र लिकर उसमें दो मुठ्ठी मसूर की दाल बाँधकर मंगलवार के दिन किसी भिखारी को दान करनी चाहिए।
५॰ मंगलवार के दिन हनुमानजी के चरण से सिन्दूर लिकर उसका टीका माथे पर लगाना चाहिए।
६॰ बंदरों को गुड़ और चने खिलाने चाहिए।
७॰ अपने घर में लाल पुष्प वाले पौधे या वृक्ष लगाकर उनकी देखभाल करनी चाहिए।
मंगल के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु मंगलवार का दिन, मंगल के नक्षत्र (मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा) तथा मंगल की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
बुध
१॰ अपने घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगाना चाहिए तथा निरन्तर उसकी देखभाल करनी चाहिए। बुधवार के दिन तुलसी पत्र का सेवन करना चाहिए।
२॰ बुधवार के दिन हरे रंग की चूड़ियाँ हिजड़े को दान करनी चाहिए।
३॰ हरी सब्जियाँ एवं हरा चारा गाय को खिलाना चाहिए।
४॰ बुधवार के दिन गणेशजी के मंदिर में मूँग के लड्डुओं का भोग लगाएँ तथा बच्चों को बाँटें।
५॰ घर में खंडित एवं फटी हुई धार्मिक पुस्तकें एवं ग्रंथ नहीं रखने चाहिए।
६॰ अपने घर में कंटीले पौधे, झाड़ियाँ एवं वृक्ष नहीं लगाने चाहिए। फलदार पौधे लगाने से बुध ग्रह की अनुकूलता बढ़ती है।
७॰ तोता पालने से भी बुध ग्रह की अनुकूलता बढ़ती है।
बुध के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु बुधवार का दिन, बुध के नक्षत्र (आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती) तथा बुध की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
गुरु
१॰ ऐसे व्यक्ति को अपने माता-पिता, गुरुजन एवं अन्य पूजनीय व्यक्तियों के प्रति आदर भाव रखना चाहिए तथा महत्त्वपूर्ण समयों पर इनका चरण स्पर्श कर आशिर्वाद लेना चाहिए।
२॰ सफेद चन्दन की लकड़ी को पत्थर पर घिसकर उसमें केसर मिलाकर लेप को माथे पर लगाना चाहिए या टीका लगाना चाहिए।
३॰ ऐसे व्यक्ति को मन्दिर में या किसी धर्म स्थल पर निःशुल्क सेवा करनी चाहिए।
४॰ किसी भी मन्दिर या इबादत घर के सम्मुख से निकलने पर अपना सिर श्रद्धा से झुकाना चाहिए।
५॰ ऐसे व्यक्ति को परस्त्री / परपुरुष से संबंध नहीं रखने चाहिए।
६॰ गुरुवार के दिन मन्दिर में केले के पेड़ के सम्मुख गौघृत का दीपक जलाना चाहिए।
७॰ गुरुवार के दिन आटे के लोयी में चने की दाल, गुड़ एवं पीसी हल्दी डालकर गाय को खिलानी चाहिए।
गुरु के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु गुरुवार का दिन, गुरु के नक्षत्र (पुनर्वसु, विशाखा, पूर्व-भाद्रपद) तथा गुरु की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
शुक्र
१॰ काली चींटियों को चीनी खिलानी चाहिए।
२॰ शुक्रवार के दिन सफेद गाय को आटा खिलाना चाहिए।
३॰ किसी काने व्यक्ति को सफेद वस्त्र एवं सफेद मिष्ठान्न का दान करना चाहिए।
४॰ किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए जाते समय १० वर्ष से कम आयु की कन्या का चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लेना चाहिए।
५॰ अपने घर में सफेद पत्थर लगवाना चाहिए।
६॰ किसी कन्या के विवाह में कन्यादान का अवसर मिले तो अवश्य स्वीकारना चाहिए।
७॰ शुक्रवार के दिन गौ-दुग्ध से स्नान करना चाहिए।
शुक्र के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु शुक्रवार का दिन, शुक्र के नक्षत्र (भरणी, पूर्वा-फाल्गुनी, पुर्वाषाढ़ा) तथा शुक्र की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
शनि
१॰ शनिवार के दिन पीपल वृक्ष की जड़ पर तिल्ली के तेल का दीपक जलाएँ।
२॰ शनिवार के दिन लोहे, चमड़े, लकड़ी की वस्तुएँ एवं किसी भी प्रकार का तेल नहीं खरीदना चाहिए।
३॰ शनिवार के दिन बाल एवं दाढ़ी-मूँछ नही कटवाने चाहिए।
४॰ भड्डरी को कड़वे तेल का दान करना चाहिए।
५॰ भिखारी को उड़द की दाल की कचोरी खिलानी चाहिए।
६॰ किसी दुःखी व्यक्ति के आँसू अपने हाथों से पोंछने चाहिए।
७॰ घर में काला पत्थर लगवाना चाहिए।
शनि के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु शनिवार का दिन, शनि के नक्षत्र (पुष्य, अनुराधा, उत्तरा-भाद्रपद) तथा शनि की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
राहु
१॰ ऐसे व्यक्ति को अष्टधातु का कड़ा दाहिने हाथ में धारण करना चाहिए।
२॰ हाथी दाँत का लाकेट गले में धारण करना चाहिए।
३॰ अपने पास सफेद चन्दन अवश्य रखना चाहिए। सफेद चन्दन की माला भी धारण की जा सकती है।
४॰ जमादार को तम्बाकू का दान करना चाहिए।
५॰ दिन के संधिकाल में अर्थात् सूर्योदय या सूर्यास्त के समय कोई महत्त्वपूर्ण कार्य नहीम करना चाहिए।
६॰ यदि किसी अन्य व्यक्ति के पास रुपया अटक गया हो, तो प्रातःकाल पक्षियों को दाना चुगाना चाहिए।
७॰ झुठी कसम नही खानी चाहिए।
राहु के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु शनिवार का दिन, राहु के नक्षत्र (आर्द्रा, स्वाती, शतभिषा) तथा शनि की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
केतु
१॰ भिखारी को दो रंग का कम्बल दान देना चाहिए।
२॰ नारियल में मेवा भरकर भूमि में दबाना चाहिए।
३॰ बकरी को हरा चारा खिलाना चाहिए।
४॰ ऊँचाई से गिरते हुए जल में स्नान करना चाहिए।
५॰ घर में दो रंग का पत्थर लगवाना चाहिए।
६॰ चारपाई के नीचे कोई भारी पत्थर रखना चाहिए।
७॰ किसी पवित्र नदी या सरोवर का जल अपने घर में लाकर रखना चाहिए।
केतु के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु मंगलवार का दिन, केतु के नक्षत्र (अश्विनी, मघा तथा मूल) तथा मंगल की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
रमल से जानें अपने अभीष्ट प्रश्नों का हल
स्नानादि से निवृत्त होकर अपने इष्टदेव का ध्यान करें तथा निम्न मन्त्र का यथासंभव या १०८ बार जप करें- “ॐ नमो भगवति देवी कूष्माण्डिनि सर्वकार्यप्रसाधिनि सर्वनिमित्तप्रकाशिनि एहि एहि त्वर त्वर वरं देहि लिहि मातंगिनि लिहि सत्यं ब्रूहि ब्रूहि स्वाहा।।”
मन्त्र जप के पश्चात अपने अभीष्ट प्रश्न का विचार करें तथा १६ कोष्ठकों वाले यंत्र के किसी एक कोष्ठक पर अपनी अंगुली रख दें। तथा सम्बन्धित प्रश्न का उत्तर प्राप्त करें।
| १॰ लह्यान (खारिज) | २ कब्जुल (दाखिल) | ३॰ कब्जुल (खारिज़) | ४॰ जमात (साबित) |
| ५॰ फरहा (मुंकलिब) | ६॰ उक़ला (मुंकलिब) | ७॰ अंकीस (दाखिल) | ८॰ हुमरा (साबित) |
| ९॰ बयाज (साबित) | १० नस्त्रुल (खारिज़) | ११॰ नस्त्रुल (दाखिल) | १२॰ अतवे (खारिज) |
| १३॰ नकी (मुंकलिब) | १४॰ अवते (दाखिल) | १५इज्जतमा (साबित) | १६॰ तरीक (मुंकलिब) |
दाम्पत्य जीवन कैसा रहेगा?
१॰ लह्यान (खारिज)-जीवनसाथी प्रेम का दिखावा करेगा, वास्तविक प्रेम नहीं।
२॰ कब्जुल (दाखिल)-जीवनसाथी बहुत प्यार करेगा।
३॰ कब्जुल (खारिज़)-जीवनसाथी प्रेम का दिखावा करेगा, वास्तविक प्रेम नहीं।
४॰ जमात (साबित)-परेशानियों एवं दिक्कतों के बाद दाम्पत्य सुख मिलेगा।
५॰ फरहा (मुंकलिब)-दाम्पत्य जीवन उतार-चढ़ावपूर्ण होगा।
६॰ उक़ला (मुंकलिब)-दाम्पत्य जीवन उतार-चढ़ावपूर्ण होगा।
७॰ अंकीस (दाखिल)-जीवनसाथी बहुत प्यार करेगा।
८॰ हुमरा (साबित)-विवाह के काफी समय बाद सुख मिलेगा। स्थायित्व है।
९॰ बयाज (साबित)-विवाह के काफी समय बाद सुख मिलेगा। स्थायित्व है।
१०॰ नस्त्रुल (खारिज़)-जीवनसाथी प्रेम का दिखावा करेगा, वास्तविक प्रेम नहीं।
११॰ नस्त्रुल (दाखिल)-जीवनसाथी बहुत प्यार करेगा।
१२॰ अतवे (खारिज)-जीवनसाथी प्रेम का दिखावा करेगा, वास्तविक प्रेम नहीं।
१३॰ नकी (मुंकलिब)-दाम्पत्य जीवन उतार-चढ़ावपूर्ण होगा।
१४॰ अवते (दाखिल)-जीवनसाथी बहुत प्यार करेगा।
१५॰ इज्जतमा (साबित)-विवाह के काफी समय बाद सुख मिलेगा। स्थायित्व है।
१६॰ तरीक (मुंकलिब)-दाम्पत्य जीवन उतार-चढ़ावपूर्ण होगा।
विवाह होगा या नहीं?
१॰ लह्यान (खारिज)-विवाह शीघ्र तथा अवश्य होगा एवं दाम्पत्य जीवन सुखमय रहेगा।
२॰ कब्जुल (दाखिल)-विवाह शीघ्र तथा अवश्य होगा एवं दाम्पत्य जीवन सुखमय रहेगा।
३॰ कब्जुल (खारिज़)-विवाह विघ्न एवं परेशानियों के उपरान्त ही संभव होगा।
४॰ जमात (साबित)-विवाह में अभी विलम्ब है।
५॰ फरहा (मुंकलिब)-अनेक विवाह प्रस्तावों के आने के बाद विवाह तय होगा।
६॰ उक़ला (मुंकलिब)-विवाह तय होते ही टूटेगा तथा दूसरा विवाह सफल होगा।
७॰ अंकीस (दाखिल)-विवाह शीघ्र तथा अवश्य होगा एवं दाम्पत्य जीवन सुखमय रहेगा।
८॰ हुमरा (साबित)-विवाह विलम्ब से होने की सम्भावना है।
९॰ बयाज (साबित)-विवाह में अभी विलम्ब है।
१०॰ नस्त्रुल (खारिज़)-विवाह शीघ्र तथा अवश्य होगा एवं दाम्पत्य जीवन सुखमय रहेगा।
११॰ नस्त्रुल (दाखिल)-विवाह शीघ्र होने वाला है।
१२॰ अतवे (खारिज)-विवाह इसी वर्ष होने वाला है।
१३॰ नकी (मुंकलिब)-विवाह होना असंभव है।
१४॰ अवते (दाखिल)-विवाह शीघ्र तथा अवश्य होगा एवं दाम्पत्य जीवन सुखमय रहेगा।
१५॰ इज्जतमा (साबित)-विवाह में अभी विलम्ब है।
१६॰ तरीक (मुंकलिब)-अनेक विवाह प्रस्तावों के आने के बाद विवाह तय होगा।
लड़का होगा या लड़की?
१॰ लह्यान (खारिज)-गर्भ में लड़का है।
२॰ कब्जुल (दाखिल)-गर्भ में लड़की है।
३॰ कब्जुल (खारिज़)-गर्भ में लड़का है।
४॰ जमात (साबित)-गर्भ में लड़की है।
५॰ फरहा (मुंकलिब)-गर्भ में लड़का है।
६॰ उक़ला (मुंकलिब)-गर्भपात आदि से संतान हानि संभव है।
७॰ अंकीस (दाखिल)-गर्भ में लड़की है।
८॰ हुमरा (साबित)-गर्भ में लड़का है।
९॰ बयाज (साबित)-गर्भ में लड़की है।
१०॰ नस्त्रुल (खारिज़)-गर्भ में लड़का है।
११॰ नस्त्रुल (दाखिल)-गर्भ में लड़की है।
१२॰ अतवे (खारिज)-गर्भ में लड़का है।
१३॰ नकी (मुंकलिब)-गर्भपात आदि से संतान हानि संभव है।
१४॰ अवते (दाखिल)-गर्भ में लड़की है।
१५॰ इज्जतमा (साबित)-गर्भ में लड़का है।
१६॰ तरीक (मुंकलिब)-गर्भ में लड़की है।
अमुक व्यक्ति मुझसे प्रेम करता है या नहीं?
१॰ लह्यान (खारिज)-प्रेम कम करता है।
२॰ कब्जुल (दाखिल)-बहुत प्रेम करता है।
३॰ कब्जुल (खारिज़)-प्रेम दिखावा है।
४॰ जमात (साबित)-बहुत समय के बाद प्रेम करेगा।
५॰ फरहा (मुंकलिब)-प्रेम स्थायी नहीं है।
६॰ उक़ला (मुंकलिब)-प्रेम दिखावा है।
७॰ अंकीस (दाखिल)-नहीं करता है।
८॰ हुमरा (साबित)-बहुत समय के बाद प्रेम करेगा।
९॰ बयाज (साबित)-बहुत समय के बाद प्रेम करेगा।
१०॰ नस्त्रुल (खारिज़)-प्रेम कम करता है।
११॰ नस्त्रुल (दाखिल)-बहुत प्रेम करता है।
१२॰ अतवे (खारिज)-प्रेम दिखावा है।
१३॰ नकी (मुंकलिब)-नहीं करता है।
१४॰ अवते (दाखिल)-बहुत प्रेम करता है।
१५॰ इज्जतमा (साबित)-बहुत समय के बाद प्रेम करेगा।
१६॰ तरीक (मुंकलिब)-प्रेम स्थायी नहीं है।
चोरी गया धन वापस मिलेगा या नहीं?
१॰ लह्यान (खारिज)-वापस नहीं मिलेगा।
२॰ कब्जुल (दाखिल)-चोर से भी दूर जा चुका है।
३॰ कब्जुल (खारिज़)-वापस नहीं मिलेगा।
४॰ जमात (साबित)-वापस शीघ्र मिलेगा।
५॰ फरहा (मुंकलिब)-वापस कुछ मात्रा में ही मिलेगा।
६॰ उक़ला (मुंकलिब)-वापस नहीं मिलेगा।
७॰ अंकीस (दाखिल)-वापस कुछ मात्रा में ही मिलेगा।
८॰ हुमरा (साबित)-वापस कुछ मात्रा में ही मिलेगा।
९॰ बयाज (साबित)-वापस शीघ्र मिलेगा।
१०॰ नस्त्रुल (खारिज़)-वापस नहीं मिलेगा।
११॰ नस्त्रुल (दाखिल)-वापस शीघ्र मिलेगा।
१२॰ अतवे (खारिज)-चोर से भी दूर जा चुका है।
१३॰ नकी (मुंकलिब)-वापस कुछ मात्रा में ही मिलेगा।
१४॰ अवते (दाखिल)-वापस शीघ्र मिलेगा।
१५॰ इज्जतमा (साबित)-वापस शीघ्र मिलेगा।
१६॰ तरीक (मुंकलिब)-वापस कुछ मात्रा में ही मिलेगा।
मुझे किस व्यवसाय से लाभ होगा?
१॰ लह्यान (खारिज)-धोखेबाजी, चोरी एवं अनैतिक व्यक्तियों की सहायता से।
२॰ कब्जुल (दाखिल)-वस्त्र, सौन्दर्यप्रसाधन एवं कृषि आदि से।
३॰ कब्जुल (खारिज़)-धोखेबाजी, चोरी एवं अनैतिक व्यक्तियों की सहायता से।
४॰ जमात (साबित)-पशुपालन तथा चिकित्सा से जुड़े कार्यों से।
५॰ फरहा (मुंकलिब)-कलाकारी, पंसारी, जड़ी-बूटी तथा विनोदपूर्ण कार्यों से।
६॰ उक़ला (मुंकलिब)-ठगी विद्या, धोखेबाजी, चोरी जानवरों के क्रय-विक्रय से।
७॰ अंकीस (दाखिल)-सोना-चाँदी, वकालत एवं वस्तुओं को कूटने-पीसने के कार्य से।
८॰ हुमरा (साबित)-पत्रवाहक के कार्य तथा भिक्षावृत्ति से।
९॰ बयाज (साबित)-पत्रवाहक के कार्य तथा भिक्षावृत्ति से।
१०॰ नस्त्रुल (खारिज़)-धोखेबाजी, चोरी एवं अनैतिक व्यक्तियों की सहायता से।
११॰ नस्त्रुल (दाखिल)-विद्या के द्वारा।
१२॰ अतवे (खारिज)-कृषि कार्य, दलाली, दुकानदारी से।
१३॰ नकी (मुंकलिब)-वस्त्र-विक्रेता, ज्योतिष, क्रय-विक्रय से।
१४॰ अवते (दाखिल)-वस्त्र, सौन्दर्यप्रसाधन एवं कृषि आदि से।
१५॰ इज्जतमा (साबित)-संगीत, गायन, वादन, किसी विद्या के प्रशिक्षण से।
१६॰ तरीक (मुंकलिब)-ड्राइक्लीनर्स, मेवा व्यवसाय एवं गुप्तचरी से।
मुझे विदेश यात्रा से लाभ होगा या हानि?
१॰ लह्यान (खारिज)-विदेश जाने का कोई लाभ नहीं होगा।
२॰ कब्जुल (दाखिल)-विदेश यात्रा से लाभ होगा।
३॰ कब्जुल (खारिज़)-विदेश यात्रा से शारीरिक कष्ट होगा।
४॰ जमात (साबित)-विदेश जाने का कोई लाभ नहीं होगा।
५॰ फरहा (मुंकलिब)-विदेश में मित्र से लाभ होगा।
६॰ उक़ला (मुंकलिब)-विदेश यात्रा से शारीरिक कष्ट होगा।
७॰ अंकीस (दाखिल)-विदेश में मित्र से लाभ होगा।
८॰ हुमरा (साबित)-विदेश यात्रा से शारीरिक कष्ट होगा।
९॰ बयाज (साबित)-विदेश यात्रा से लाभ होगा।
१०॰ नस्त्रुल (खारिज़)-विदेश में मित्र से लाभ होगा।
११॰ नस्त्रुल (दाखिल)-विदेश यात्रा से लाभ होगा।
१२॰ अतवे (खारिज)-विदेश यात्रा से शारीरिक कष्ट होगा।
१३॰ नकी (मुंकलिब)-विदेश में मित्र से लाभ होगा।
१४॰ अवते (दाखिल)-विदेश जाने का कोई लाभ नहीं होगा।
१५॰ इज्जतमा (साबित)-विदेश यात्रा से लाभ होगा।
१६॰ तरीक (मुंकलिब)-विदेश में मित्र से लाभ होगा।
अमुक कैदी छूटेगा या नहीं?
१॰ लह्यान (खारिज)-कैदी बन्धन से मुक्त हो जायेगा।
२॰ कब्जुल (दाखिल)-कैदी मुक्त नहीं होगा।
३॰ कब्जुल (खारिज़)-कैदी बन्धन से मुक्त हो जायेगा।
४॰ जमात (साबित)-काफी समय तक बंधन में कष्ट भोगने के बाद छूटेगा।
५॰ फरहा (मुंकलिब)-कैदी बंधन में अत्यधिक कष्ट भोगेगा तथा अधिक विलम्ब से छूटने की सम्भावना है।
६॰ उक़ला (मुंकलिब)-कैदी बंधन में अत्यधिक कष्ट भोगेगा तथा अधिक विलम्ब से छूटने की सम्भावना है।
७॰ अंकीस (दाखिल)-कैदी मुक्त नहीं होगा।
८॰ हुमरा (साबित)-काफी समय तक बंधन में कष्ट भोगने के बाद छूटेगा।
९॰ बयाज (साबित)-काफी समय तक बंधन में कष्ट भोगने के बाद छूटेगा।
१०॰ नस्त्रुल (खारिज़)-कैदी बन्धन से मुक्त हो जायेगा।
११॰ नस्त्रुल (दाखिल)-कैदी मुक्त नहीं होगा।
१२॰ अतवे (खारिज)-कैदी बन्धन से मुक्त हो जायेगा।
१३॰ नकी (मुंकलिब)-कैदी बंधन में अत्यधिक कष्ट भोगेगा तथा अधिक विलम्ब से छूटने की सम्भावना है।
१४॰ अवते (दाखिल)-कैदी मुक्त नहीं होगा।
१५॰ इज्जतमा (साबित)-काफी समय तक बंधन में कष्ट भोगने के बाद छूटेगा।
१६॰ तरीक (मुंकलिब)-कैदी बंधन में अत्यधिक कष्ट भोगेगा तथा अधिक विलम्ब से छूटने की सम्भावना है।
अमुक स्थान पर गड़ा धन है या नहीं ?
१॰ लह्यान (खारिज)-नहीं है।
२॰ कब्जुल (दाखिल)-है।
३॰ कब्जुल (खारिज़)-नहीं है।
४॰ जमात (साबित)-मेहनत व्यर्थ जाएगी।
५॰ फरहा (मुंकलिब)-थोड़ा है।
६॰ उक़ला (मुंकलिब)-है।
७॰ अंकीस (दाखिल)-है।
८॰ हुमरा (साबित)-मेहनत व्यर्थ जाएगी।
९॰ बयाज (साबित)-मेहनत व्यर्थ जाएगी।
१०॰ नस्त्रुल (खारिज़)-नहीं है।
११॰ नस्त्रुल (दाखिल)-है।
१२॰ अतवे (खारिज)-नहीं है।
१३॰ नकी (मुंकलिब)-होना चाहिए।
१४॰ अवते (दाखिल)-है।
१५॰ इज्जतमा (साबित)-मेहनत व्यर्थ जाएगी।
१६॰ तरीक (मुंकलिब)-होना चाहिए।
मुकदमे में हार होगी या जीत?
१॰ लह्यान (खारिज)-जीत अवश्य होगी।
२॰ कब्जुल (दाखिल)-जीत अवश्य होगी।
३॰ कब्जुल (खारिज़)-विरोधी पक्ष प्रबल है।
४॰ जमात (साबित)-विरोधी से समझौता करना होगा।
५॰ फरहा (मुंकलिब)-जीत अवश्य होगी।
६॰ उक़ला (मुंकलिब)-विरोधी पक्ष प्रबल है।
७॰ अंकीस (दाखिल)-विरोधी पक्ष प्रबल है।
८॰ हुमरा (साबित)-विरोधी पक्ष प्रबल है। जीत नहीं होगी।
९॰ बयाज (साबित)-जीत अवश्य होगी।
१०॰ नस्त्रुल (खारिज़)-जीत अवश्य होगी।
११॰ नस्त्रुल (दाखिल)-जीत अवश्य होगी।
१२॰ अतवे (खारिज)-विरोधी पक्ष प्रबल है।
१३॰ नकी (मुंकलिब)-विरोधी पक्ष प्रबल है।
१४॰ अवते (दाखिल)-जीत अवश्य होगी।
१५॰ इज्जतमा (साबित)-विरोधी से समझौता होगा।
१६॰ तरीक (मुंकलिब)-जीत अवश्य होगी।
गौतम केवली महाविद्या
| १११ | ११२ | ११३ | १२१ | १२२ | १२३ | १३१ | १३२ | १३३ |
| २११ | २१२ | २१३ | २२१ | २२२ | २२३ | २३१ | २३२ | २३३ |
| ३११ | ३१२ | ३१३ | ३२१ | ३२२ | ३२३ | ३३१ | ३३२ | ३३३ |
अंक शकुनावली कोष्ठक से उत्तर जानने से पूर्व शुद्ध एवं पवित्र होकर अपने इष्ट देव का स्मरण करने के उपरान्त अंक शकुनावली के किसी एक कोष्ठक पर अपनी अंगुली अथवा शलाका रखें। कोष्ठक में अंकित संख्या के अनुसार अपने अभीष्ट प्रश्न का हल नीचे दिये गये अंकों से जानने का प्रयास करें।
१११॰ आपने जो प्रश्न विचारा है वह सफल होगा। तुम्हारे खराब दिनों का नाश होकर अच्छे दिन आए हैं। मन की कामनाएँ पूर्ण होंगी। विविध प्रकार की चिंताएँ मन में रहती हैं, वे अब थोड़े दिनों में नाश हो जाएँगी। एक मित्र के धोखे को भोग रहे हो। धर्म कार्य की इच्छा है, परन्तु पापकर्म से विघ्न आता है। आमदनी से खर्च अधिक रहता है। कोई कार्य सिद्ध होने को आता है, तो शत्रु उसमें विघ्न डाल देते हैं। दान-पुण्य करो। जिससे मन की अभिलाषा पूर्ण होगी। विरोधी चाहे कितनी कोशिश करें, परन्तु तुम्हारी धारणा अवश्य फलीभूत होगी।
११२॰ आपका अभीष्ट प्रश्न लाभदायक है। धन की प्राप्ति होगी। भाग्योदय के दिन अब नजदीक आ गए हैं। जिस कार्य को हाथ में लोगे, उसमें जय प्राप्त करोगे। प्रियजन का मिलाप होगा। धर्म के कार्य करते रहो, जिससे पुण्य की प्राप्ति होगी तथा सुख भी मिलेगा। मन चिन्तित रहता है। भाइयों से जुदाई होगी। मकान बनाने का इरादा करते हो वह पार पड़ेगा। जमीन से तुमको लाभ होगा। आमदनी से खर्च अधिक होता है। तीर्थों की यात्रा करने की अभिलाषा है, वह पूर्ण होगी। धार्मिक कार्य सम्पन्न होगा।
११३॰ आपका अभीष्ट प्रश्न अच्छा है। तुम्हारे दिल को आराम मिलेगा। सुख-चैन प्राप्त करोगे। जो कार्य मन में सोचा है, उसमें विजय प्राप्त करोगे। प्रियजनों का मिलाप होगा। चिन्ता के दिन निकल चुके हैं तथा अब अच्छे दिन आए हैं। धर्म के प्रभाव से सुखी हुए हो तथा आगे भी सुख प्राप्त करोगे। कष्ट सहन करते हुए भी दूसरे का कार्य करते हो परन्तु अपने कार्य में सुस्ती रखते हो। बुद्धि तेज है, बिगड़े कार्य को भी सुधार लेते हो। भविष्य में लाभ मिलेगा।
१२१॰ आपका विचारा हुआ प्रश्न लाभदायक है। बहुत दिनों तक दुःख सहन करने से निराश हो गए हो, बुरे दिन निकल गए हैं और अब शुभ दिन आए हैं। मन की इच्छाएँ फलीभूत होंगी। जितनी लक्ष्मी गंवाई है उससे भी अधिक प्राप्त करोगे। जिस काम की चिन्ता करते हो वह चिन्ता मिट जायेगी, उसमें एक व्यक्ति विघ्न उपस्थित करने आयेगा, किन्तु अन्त में तुमको सफलता प्राप्त होगी। भाइयों तथा सम्बन्धियों का निभाव करते हो, जिससे तुम्हारी कीर्ति बढ़ी है। दिल के उदार हो, जहाँ जाते हो वहाँ सुख मिलता है।
१२२॰ आपने जो काम विचारा है, उसमें सफलता नहीं मिल पाएगी। आपने आज तक बहुतों का भला किया है। अशुभ कर्म के उदय से विघ्न उपस्थित होते हैं। जहाँ तक बन सके वहाँ तक धर्म करो। अपने इष्टदेव की यथाशक्ति आराधना तथा मन्त्र का जप करो, जिससे तकलीफ दूर होगी।
१२३॰ आपके अभीष्ट कार्य में सफलता अवश्य मिलेगी। इतने पापकर्म के थे तथा आपने महान संकट उठाये हैं। अब शुभ दिन आए हैं। बहुतों का भला किया, किन्तु उन्होनें उपकार न माना। धर्म के निमित्त का निकाला हुआ पैसा घर में न रखो। तीर्थों की यात्रा करो, जिस स्थान पर दुःखी हुए हो, उस स्थान का त्याग करो, दूसरे स्थान में जाकर रहो। परदेश में लाभ होगा। तुम्हारा दिल चिन्ता में डूबा रहता है। अब शुभ कर्म का उदय हुआ है। विचारे हुए कार्य में सफलता एवं धन प्राप्त होगा।
१३१॰ जो बात आपने सोची है वह अवश्य सिद्ध होगी, जिसका नुकसान हुआ है वह दूर होकर भविष्य में लाभ होगा। धन मिलेगा। तुम्हारे हाथ से धर्म के कार्य होंगे। जिस मनुष्य से मुलाकात चाहते हो वह होगी। चिन्ता के दिन अब गए हैं। धातु, धन, सम्पत्ति और कुटुम्ब की वृद्धि होगी।
१३२॰ आज तक तुम्हारे बड़े-बड़े दुश्मन हुए अब उनका जोर नहीं चलेगा। मन में विचारे हुए कार्यों में सफलता प्राप्त करोगे। इज्जत में वृद्धि होगी। तुम्हारे हाथों से धर्म के कार्य होंगे, मन वांछित सुख की प्राप्ति होगी। भाइयों का मिलाप होगा। दान-पुण्य के प्रभाव से सुखी होंगे।
१३३॰ इतने दिन संकट रहा। चिंतित कार्य अच्छी तरह से पार न पड़ा, अब अच्छे दिनों की शुरुआत हुई है, जो कार्य विचारा है वह फलीभूत होगा, किसी भी प्रकार का विघ्न नहीं आयेगा। इष्टदेव के प्रभाव से लक्ष्मी प्राप्त होगी, प्रियजन से अचानक लाभ होगा।
२११॰ तुमने मन में जिस कार्य का विचार किया है, वह सफल नहीं होगा। इसके सिवाय कोई दूसरा काम करो। तीर्थों की यात्रा करो, जिससे पुण्य का लाभ हो। दुश्मन लोग तुमको बाधाएँ डालते हैं।
२१२॰ विचारा हुआ कार्य होगा। प्रेमिका से लाभ होगा। कुटुम्ब की वृद्धि होगी। बहुत मुद्दत से विचारा हुआ कार्य होगा। दुश्मन तुम्हारे विरुद्ध कोशिश करेंगे, किन्तु तुम्हारे सद्भाग्य के आगे उनका जोर नहीं चलेगा। तीर्थों की यात्रा करने की इच्छा है वह हो सकेगी। मकान बनाने का तथा जमीन खरीदने का तुम्हारा इरादा सफल होगा। तुमको जमीन से लाभ है। भाग्यबल से कार्य सिद्ध होंगे।
२१३॰ दुःख के दिन अब दूर हो गए हैं। सुख के दिन शुरु हुए हैं। बहुत दिनों से कष्ट उठा रहे हो, परदेश गए तो भी सुख की प्राप्ति न हुई, किन्तु अब सुख भोगने के दिन प्राप्त हुए हैं। आबरु बढ़ेगी, संतान का सुख होगा। इतने दिनों मित्रों तथा कुटुम्बी जनों की तरफ से दुःख सहन किया। जहाँ तक बना दूसरों का भला किया, परन्तु उन लोगों ने गुण नहीं माना। शत्रु लोग पग-पग पर तैयार रहते हैं, किन्तु उनका जोर नहीं चलता क्योंकि तुम्हारा भाग्य बलवान् है। पास में धन थोड़ा है, किन्तु इज्जत अच्छी है, इसलिये जितना प्राप्त करने का विचार करोगे उतना प्राप्त कर सकोगे। मित्र लोगों से जैसा चाहिए वैसा सुख नहीं है। इज्जत आबरु के लिये खर्च बहुत करते हो। तुम्हारा धर्म सुधरा हुआ है, इसलिए धर्म पर श्रद्धा रखो।
२२१॰ इतने दिन गए वे अच्छे गए, जो जो कार्य किए वे भी पार पड़ गए, किन्तु अब जो कार्य दिल में विचारा है वह पाप कर्म के उदय से पूर्ण नहीं होगा। मित्र लोग भी शत्रु हो जाएँगे। कुटुम्ब में अनबन रहेगी, भाई जुदा होंगे। जो काम दिल में विचारा है, उसका त्याग करना ही श्रेष्ठ है। धर्म पर श्रद्धा रखो, इष्टदेव की सेवा करो, दान-पुण्य के प्रभाव से सुख मिलेगा।
२२२॰ जो काम मन में विचारा है, उसको छोड़कर दूसरा काम करो। यदि इस विचारे हुए कार्य को करोगे तो संकट उत्पन्न होगा, नुकसान होगा, शत्रु लोग विघ्न उपस्थित करेंगे। इष्टदेव की सेवा करो, तीर्थों पर जाओ, जिससे दूसरे कार्य भी सुधरेंगे। दिल में विविध प्रकार की चिन्ताओं ने वास किया है, वह विचारे हुए कार्य को छोड़ देने से दूर होगी।
२२३॰ यह सवाल अच्छा है, सुख के दिन नजदीक आए हैं। व्यापार से धन प्राप्त होगा, ऐशो-आराम प्राप्त करोगे। पत्नी का सुख प्राप्त करोगे तथा संतान की वृद्धिहोगी, जो कार्य करोगे उसमें लाभ प्राप्त करोगे। ईमानदारी से काम करते हो तो अन्त में भला ही होगा। धर्म के प्रभाव से सुखी होंगे, इसलिये धर्म को भूलना मत, धर्म के कार्यों में सुस्ती रखना ठीक नहीं।
२३१॰ जिस कार्य के लिए मन में विचार किया है, वह कार्य तीन मास में होगा। अपनी स्त्री की तरफ से लाभ होगा। आज तक कुटुम्बीजनों की तरफ से सुख नही मिला, किन्तु भविष्य में मिलेगा। संतानों की वृद्धि होगी। ससुराल के खर्च की चिन्ता है, सो मिट जाएगी। आबरु के लिए आमदनी से खर्च अधिक करना पड़ता है। तीर्थों की यात्रा करने का इरादा है, किन्तु विघ्न आता है। भविष्य में धर्म कार्य कर सकोगे। हृदय में जिस कार्य की चिन्ता है, वह धर्म के प्रभाव से दूर हो जाएगी, इसलिए धर्म पर श्रद्धा रखो, जिससे सफलता प्राप्त कर सकोगे।
२३२॰ जो काम विचारा है, उसे छोड़कर कोई दूसरा काम करो। विचारे हुए कार्य को करने में लाभ नहीं है, यदि करोगे तो तुमको तुम्हारा स्थान छोड़कर दूसरे स्थान पर जाना पड़ेगा, कुटुम्बीजनों का वियोग होगा। इसलिए उचित है कि इस कार्य को छोड़ दो। धर्म में होशियार रहना तथा अपनी शक्ति के अनुसार दान-पुण्य करना जिससे सुख हो।
२३३॰ थोड़े दिनों में धन मिलेगा। जो काम विचारा है, वह पूर्ण होगा। प्रियजनों से मिलाप होगा। जमीन, जागीर अथवा मकान से लाभ होगा। आबरु बढ़ेगी। धर्म कार्यों में खर्च करो। उसके प्रताप से सुख-चैन रहेगा। राज्यपक्ष से लाभ होगा। मन की धारणा पूर्ण होगी। स्त्री की तरफ से सुख है। एक समय अकस्मात् लाभ मिलेगा।
३११॰ यह सवाल बहुत ही गरम है। जिस कार्य का विचार किया है, वह पूर्ण होगा। मुकदमा जीत जाओगे, व्यापार रोजगार में लाभ होगा। कीर्ति बढ़ेगी, राज्य की तरफ से लाभ होगा। धर्म के प्रभाव से सुख मिला है तथा भविष्य में भी मिलेगा। दूसरों के कार्य परिश्रम से पूरा करते हो, किन्तु अशुभ कर्म उदित होने से अपने कर्म में उदासीन रहते हो, विदेश यात्रा होगी और वहाँ लाभ होगा। धर्म पर श्रद्धा रखो जिससे संकट दूर हों। अपने हाथ से लक्ष्मी प्राप्त करोगे।
३१२॰ जो कार्य विचारा है उसे छोड़कर कोई दूसरा काम करो अन्यथा शत्रु लोग विघ्न डालेंगे, दौलत की खराबी होगी, घर के मनुष्यों तथा पशुओं पर संकट आएगा, इसलिए विचारे हुए कार्य को छोड़ देना ही उचित है। धर्म के प्रभाव से सब कार्य सफल होते हैं। निराश्रितों को आश्रय दो तथा देवाधिदेव का स्मरण करो जिससे सुखी होंगे।
३१३॰ यह प्रश्न अच्छा है। धन तथा स्त्री से सहयोग एवं सुख मिलेगा। संतान से सुख मिलेगा। संतान होगी, प्रियजन का मिलाप होगा। अमुक मुद्दत की धारी हुई धारणा सफल होगी। चिन्ता के दिन अब दूर हुए हैं। देव गुरु तथा धर्म की सेवा करो। दुश्मन लोग सताते हैं, किन्तु अब तुम्हारा प्रारब्ध बलवान् बना है जिससे इन लोगों का जोर नहीं चलेगा। जमीन से लाभ होगा। कीर्ति के लिए खर्च अधिक करना पड़ता है। मित्रों से लाभ होगा।
३२१॰ जमीन, मकान अथवा बाग-बगीचे से लाभ होगा। धन प्राप्त करोगे, स्नेही जन से मिलाप होगा। किसी भी मनुष्य के साथ मित्रता होगी और उसके द्वारा धनादि की प्राप्ति होगी। पुण्य के उदय से इच्छाएँ परीपूर्ण होगी। धर्म का आराधन करो। दुश्मन लोग पग-पग पर तैयार रहेंगे, किन्तु सन्मुख होने से उनका जोर नहीं चलेगा। अपनी शक्ति के अनुसार खर्च करो। मकान बनाने के मनोरथ फलीभूत होंगे। धन पैदा करते हो, किन्तु खर्च अधिक होने से इकट्ठा नहीं होता है, पिता से धन थोड़ा मिलेगा। स्त्री की तरफ से लाभ होगा। वृद्धावस्था में धर्म के कार्य बन सकते हैं।
३२२॰ जो कार्य आपने मन में विचारा है, उसमे शत्रु लोग विघ्न डालेंगे, परिणाम अच्छा नहीं। राज्य की तरफ से नाराजगी होगी यदि सुखी होना चाहते हो, तो विचारा हुआ कार्य छोड़कर दूसरा कार्य करो, तुम्हारे सहयोगी बदल गए हैं, उनका विश्वास मत करना। भजन-पूजन, व्रत-नियम में ध्यान दो।
३२३॰ जिस कार्य का मन में विचार किया है, उसमें लाभ होगा, इच्छा पूर्ण होगी, स्नेही का मिलाप होगा, जो जो चिन्ताएँ उपस्थित हुई हैं, वे सब दूर होंगी। धर्म के कार्य बन सकेंगे। बहुत दिनों से परदेश में दुःख प्राप्त किया है, किन्तु अब दुःख के दिन गए। तीर्थयात्रा होगी। अब देश में जाकर आनन्द प्राप्त करोगे। धर्म के कार्यों में लक्ष्य रखो, जिससे सब सुख प्राप्त करोगे।
३३१॰ तुम्हारे मन की चिन्ता मिटेगी। बीमारी की फरियाद दूर होगी। मन की धारणा पूर्ण होगी। थोड़े दिनों में ही धन की प्राप्ति होगी। स्नेही का मिलाप होगा। धर्म-कर्म में पैसा खर्च करो, जिससे परिणाम में फायदा होगा। अच्छे दिन आए हैं, पापकर्म से इतने दिन दुःख प्राप्त किया है, परन्तु अब वे बीत गए हैं।
३३२॰ बुरे दिन गए अब अच्छे दिन आए हैं। जमीन तथा धन-दौलत में जो हानि हुई है, वह मिट जाएगी तथा भविष्य में लाभ होगा। परमेश्वर का ध्यान करो। हृदय शुद्ध है, जिससे मन की चिन्ता जल्दी दूर होगी। परदेश में रहे मनुष्य की चिन्ता है सो उसका मिलाप होगा। धर्म के प्रभाव से सुखी होंगे।
३३३॰ इतने दिन निर्धन अवस्था में व्यतीत किए, किन्तु अब धन प्राप्त होगा तथा मन की धारणा फलीभूत होगी। जीवनसाथी से सुख प्राप्त होगा, तीन महिने बाद अच्छे दिन आएँगे। इष्टदेव की आराधना करो। आमदनी से खर्च अधिक है, धन इकट्ठा किया नहीं, मित्र की तरफ से धोखा मिला है, दुश्मन लोग पीछे से निन्दा करते हैं, किन्तु सामने आकर बोल नहीं सकते। जमीन से लाभ होगा। परमेश्वर का जप करो।
स्वर विज्ञान
प्राण वायु मनुष्य के शरीर में श्वास लेने पर नासिका के माध्यम से प्रवेश करती है। नासिका में दो छिद्र होते हैं, जो बीच में एक पतली हड्डी के कारण एक दूसरे से अलग रहते हैं। मनुष्य कभी दाहिने छिद्र से और कभी बाँएँ छिद्र से श्वास लेता है। दाहिने छिद्र से श्वास लेते समय “दाहिना स्वर” तथा बाँएँ छिद्र से श्वास लेते समय “बाँयाँ स्वर” चलता है। अर्थात् श्वास-प्रश्वास की गति जिस नासिका छिद्र से प्रतीत हो, उस समय वही स्वर चलता समझें। यदि दोनों नासिका-छिद्रों से समान रुप से निःश्वास होता हो, तो उसे “मध्य स्वर” कहते हैं। यह स्वर प्रायः उस समय चलता है, जब स्वर परिवर्तन होने को होता है।
वस्तुतः नासिका के भीतर से जो श्वास निकलती है, उसी का नाम “स्वर” है। जब दाहिना स्वर चलता हो तो, सूर्य का उदय जानना चाहिए। इसीलिए दाहिने स्वर को “सूर्य स्वर” भी कहते है तथा बाँएँ स्वर को “चन्द्र स्वर”।
स्वर का सम्बन्ध नाड़ियों से है। यद्यपि शरीर में ७२,००० नाड़ियाँ हैं तथापि इनमें से २४ प्रधान है और इन २४ में से १० अति प्रधान तथा इन १० में से भी ३ नाड़ियाँ अतिशय प्रधान मानी गई है, जिनके नाम इड़ा, पिंगला तथा सुषम्णा है।
शरीर में मेरु-दण्ड के दक्षिण (दाहिने) दिशा की तरफ पिंगला (सूर्य) नाड़ी, वाम (बाँईं) तरफ इड़ा (चन्द्र) नाड़ी तथा दोनों के मध्य सुषम्णा नाड़ी है। सुषम्णा नाड़ी के प्रकाश से दोनों नथुनों से स्वर चलता है।
| दाहिना-स्वर | बायाँ-स्वर | मध्य-स्वर | |
| ग्रह | सूर्य | चन्द्र | राहु |
| नाड़ी | पिंगला | इड़ा | सुषुम्णा |
| प्रकृति | उग्र | सौम्य | मिश्रित |
| धातु | पित्त | कफ | वायु |
| लिंग | पुरुष | स्त्री | नपुंसक |
| देवता | शिव | शक्ति | अर्द्ध-नारीश्वर |
| वर्ण | कृष्ण | गौर | मिश्रित या धूम्र |
| काल | दिवस | रात्रि | सन्ध्या |
| प्रबल तत्त्व | अग्नि, वायु | जल, पृथ्वी | आकाश |
| संज्ञा | चर | स्थिर | द्वि-स्वभाव |
| वार | रवि, मंगल | सोम, बुध | बुध (या गुरु) |
| पक्ष | कृष्ण | शुक्ल | * |
| तिथि |
कृष्ण पक्ष-१,२,३,७,८,९,१३,१४,३० शुक्ल पक्ष-४,५,६,१०,११,१२ |
शुक्ल पक्ष-१,२,३,७,८,९,१३,१४,१५ कृष्ण पक्ष-४,५,६,१०,११,१२ |
* |
| मास | वैशाख, श्रावण, कार्तिक, माघ | ज्येष्ठ, भाद्रपद, मार्गशीर्ष, फाल्गुन, वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर, मीन | आषाढ़, आश्विन, पौष, चैत्र |
| संक्रान्ति | मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु, कुम्भ | वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर, मीन | * |
| राशि | १, ४, ७, १० | २, ५, ८, ११ | ३, ६, ९, १२ |
| नक्षत्र | अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, उत्तराषाढ़, अभिजित्, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती, पूर्वाभाद्रपद, रोहिणी | आश्लेषा, मघा, पूर्वा-फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाती, विशाखा, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, ज्येष्ठा | मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य |
| संख्या | विषम | सम | शून्य |
| स्थिति | नीचे, पीछे, दाहिने | ऊपर, बाएँ, सामने | * |
| दिशा | पूर्व, उत्तर | पश्चिम, दक्षिण | कोण |
जब एक स्वर को बदल कर दूसरा स्वर आ रहा हो, तो उस समय “स्वर-संक्रान्ति” होती है। जितने समय दोनों स्वर चलें, वह समय “विषुवत्-काल” कहलाता है।
स्वरों की अवस्था
जब श्वास बाहर निकल रही हो, तो स्वर की निर्गुण अवस्था होती है और स्वर को निर्गुण स्वर कहा जाता है। जब श्वास नासिका के भीतर जा रही हो, उस समय स्वर की सगुण अवस्था होती है तथा स्वर को सगुण स्वर कहते हैं। जो स्वर चल रहा हो, उसे उदित स्वर कहा जाता है और बन्द स्वर को अस्त स्वर कहते हैं। इन्हें क्रमशः पूर्ण तथा रिक्त स्वर भी कहते हैं।
स्वर सगुण और उदित हो, तो कार्य सिद्ध हो। इसके विपरीत हो, तो कार्य की हानि होती है।
अनुभवसिद्ध है कि शकुन अथवा किसी प्रश्न के उत्तर के लिए नाक से चल रहे श्वास को समझकर कोई कार्य करें तो उत्तम फलदायक सिद्ध होता है।
दाहिने स्वर (सूर्य-स्वर, पिंगला नाड़ी)- इस श्वास के चलते क्रूर कर्म, चर कार्य, उग्र कर्म, अस्त्र-शस्त्र-अभ्यास, शास्त्राभ्यास, स्त्री के साथ संसर्ग (सम्भोग), यन्त्र-तन्त्र-निर्माण, राज-पुरुष-दर्शन, युद्ध (वाद-विवाद या मुकदमा-न्यायालय), स्नान एवं शौच, नदी/समुद्र पार की यात्रा, चिकित्सकीय कार्य, विधारम्भ, वाहन खरीदना, वाहन पर चढ़ना, पर्वतारोहण, नौकारोहण, तैराकी, मद्य-पान, द्यूत-क्रीड़ा, शिकार, उग्र मन्त्र-साधना, योगाभ्यास, अध्ययन, भोजन, शयन, शेयर इत्यादि खरीदना, मशीनरी, गृहोपयोगी सामान खरीदना, क्रय, विक्रय, नया बही-खाता लिखना-लिखवाना, पत्र-लेखन, ईंट-पत्थर, लकड़ी और रत्न आदि का काटना-छाँटना, शत्रु के घर जाना, नौकरी जैसे कार्य सदैव सिद्ध होते हैं।
दाहिने स्वर से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण कार्यों को यदि कृष्ण-पक्ष में रवि, मंगल या शनिवार को दाहिने स्वर के उदय के समय किया जाए, तो सफलता मिलती है।
इडा- जब इडा अर्थात बाएं नासा छिद्र से श्वास चल रहा हो तो सौम्य कर्म, स्थिर कार्य, शान्ति कर्म, किसी से मित्रता करना, देव-दर्शन, देव-प्रतिष्ठा, मन्दिर निर्माण, पौष्टिक कार्य, गृहप्रवेश, विवाह, मकान की नीँव रखना, जलाशय, कुआँ, बाग-वाटिका निर्माण, खेतीबाडी, मित्रता, व्यापार-उद्योग-स्तापना, ग्राम-नगर बसाना, अनाज संग्रह, वस्त्र-आभूषण-सौन्दर्य प्रसाधन इत्यादि खरीदना, धार्मिक अनुष्ठान, कठिन/गम्भीर रोगों की चिकित्सा, भूमी खरीदना,स्त्री श्रंगार, नौकरी इत्यादि के लिए इन्ट्रव्यू देने जाना, संगीत-नृत्य सीखना प्रारंभ करना, रसायन-कर्म, दूर-गमन, प्रेम-निवेदन, प्रार्थना, बन्धु-मिलन, राज-तिलक, पद-ग्रहण, लघु शंका आदि कार्य शुभ रहते हैं।
बाँएँ स्वर में वर्णित महत्त्वपूर्ण कार्यों को यदि शुक्ल पक्ष में सोम, गुरु या शुक्रवार को किया जाए, तो सफलता मिलती है।
सुषुम्ना- प्राणी के शरीर में स्थित सुषुम्ना समस्त कार्यों के लिए विपरीत अथवा अशुभ ही मानी जाती है। इसके चलते अगर आप इसी कार्य हेतु प्रस्थान करें तो वो कार्य कभी भी फलीभूत नहीं हो सकता। केवल पूजा-पाठ,अनुष्ठान इत्यादि धार्मिक कृत्य ही इस स्वर के चलते सफल होते हैं।
ईश्वरे चिन्तिते कार्यं योगाभ्यासादि कर्म च ! अन्यत्र न कर्तव्यं जय लाभ सुखैषिभि:!!
भविष्य-ज्ञान-प्रश्नावली
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यह प्रश्नावली चौंतीसा यन्त्र के आधार पर बनाई गई है। प्रश्न करने वाला श्री सच्चिदानन्द स्वरुप भगवान् का स्मरण कर नीचे लिखे प्रश्नों में से अपने प्रश्न का उच्चारण करे तथा बाँयी ओर दिये ३४सा यन्त्र के किसी कोष्ठक में अंगुली रखे। इसके पश्चात् प्रश्न संख्या तथा कोष्ठक अंक को जोड़कर उसमें से एक घटायें। जो शेष बचे उस संख्या के सामने जिस देवता का नाम लिखा हो, उसी देवता के प्रश्न-फल में चौंतिसा यन्त्र में अंगुली रखे हुए कोष्ठक के अंक पर अपने प्रश्न का उत्तर पायें। यदि कोष्ठक अंक तथा प्रश्न संख्या का जोड़ ३४ से अधिक हो तो योगफल में से ३४ घटाकर शेष क्रिया करें। उदाहरण १- जैसे कि प्रश्न करने वाले ने भगवान् का स्मरण कर ९ संख्या वाले प्रश्न “विद्या प्राप्त होगी या नहीं?” बोला तथा चौंतिसा यन्त्र के कोष्ठकों में से जिस संख्या पर अंगुली रखी वह संख्या १३ है। |
| १ | सन्तान सुख होगा या नहीं? | गणेश | १८ | मेरी चिंता दूर होगी या नहीं? | शनि | |
| २ | मुकदमे में हार होगी या जीत? | ब्रह्मा | १९ | मित्र के साथ कैसी बनेगी? | राहु | |
| ३ | भाग्योदय कब होगा? | विष्णु | २० | कर्ज मिलेगा या नहीं? | केतु | |
| ४ | नौकरी मिलेगी या नहीं? | शिव | २१ | खोई वस्तु मिलेगी या नहीं? | ध्रुव | |
| ५ | तरक्की का योग है या नहीं? | इन्द्र | २२ | परदेशी कब आयेगा? | यम | |
| ६ | खेती में लाभ होगा या हानि? | अग्नि | २३ | यात्रा से लाभ मिलेगा या हानि? | विश्वेदेवा | |
| ७ | मकान बनेगा या नहीं? | वायु | २४ | भाइयों में कैसी बनेगी? | यक्ष | |
| ८ | पास होऊंगा या फेल? | सूर्य | २५ | कुआं बनेगा या नहीं? | भैरव | |
| ९ | विद्या प्राप्त होगी या नहीं? | चन्द्रमा | २६ | यह वर्ष कैसा रहेगा? | वासुकि | |
| १० | मेरा जीवन कैसा व्यतीत होगा? | वसुदेव | २७ | आज का दिन कैसा रहेगा? | कुबेर | |
| ११ | जीवन में सफलता मिलेगी या नहीं? | वरुण | २८ | पुत्र होगा या कन्या? | मित्र | |
| १२ | गड़ा धन मिलेगा या नहीं? | पृथ्वी | २९ | मेरी इच्छा पूरी होगी या नहीं? | जयन्त | |
| १३ | विवाह होगा या नहीं? | अश्विनी कुमार | ३० | स्त्री स्वभाव में कैसी मिलेगी? | तक्षक | |
| १४ | बीमार अच्छा होगा या नहीं? | मंगल | ३१ | सम्बन्धी धोखा तो नहीं देगा? | शेष | |
| १५ | स्वप्न फल कैसा है? | बुध | ३२ | अमुक स्त्री मुझे प्रेम करती है या नहीं? | काम | |
| १६ | तबादला होगा या नहीं? | बृहस्पति | ३३ | तीर्थ यात्रा को जाना होगा या नहीं? | काल | |
| १७ | व्यापार से लाभ रहेगा या हानि? | शुक्र | ३४ | मन्दिर बनेगा या नहीं? | अनन्त |
| गणेश-प्रश्न-फल १॰ सन्तान का सुख मिलेगा। २॰ किसी की सहायता से मन्दिर बनेगा। ३॰ तीर्थ यात्रा में विघ्न पड़ेगा। ४॰ शुद्ध प्रेम करती है। ५॰ सम्बन्धी धोखा दे सकता है। ६॰ स्त्री का स्वभाव गरम रहेगा। ७॰ इच्छा पूरी होने में देरी है। ८॰ कन्या होगी। ९॰ दिन मध्यम रहेगा। १०॰ यह वर्ष उत्तम है। ११॰ कूप-निर्माण नहीं होगा। १२॰ भाइयों में अच्छी बन जाएगी। १३॰ यात्रा से लाभ मिलना कठिन है। १४॰ परदेशी शीघ्र ही आयेगा। १५॰ खोई वस्तु शीघ्र मिल जायेगी। १६॰ कर्ज कठिनाई से मिलेगा। |
ब्रह्मा-प्रश्न-फल १॰ मुकदमे में जीत होगी। २॰ सन्तान हेतु गृह-देवता की पूजा करो। ३॰ मन्दिर अभी नहीं बनेगा। ४॰ तीर्थ यात्रा की आशा पूरी होगी। ५॰ इस समय वह प्रेम नहीं करती है। ६॰ सम्बन्धी धोखा दे सकता है। ७॰ स्त्री का स्वभाव सरल रहेगा। ८॰ इच्छा पूरी नहीं हो सकेगी। ९॰ पुत्र होगा। १०॰ दिन शुभ रहेगा। ११॰ यह वर्ष उत्तम नहीं है। १२॰ कूप-निर्माण की आशा पूरी होगा। १३॰ भाइयों में बननी बहुत कठिन है। १४॰ १यात्रा से लाभ होगा। १५॰ परदेशी अभी नहीं आ सकता। १६॰ खोई वस्तु नहीं मिलेगी। |
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| विष्णु-प्रश्न-फल १॰ भाग्योदय शीघ्र ही होगा। २॰ मुकदमे से जीतने में सन्देह है। ३॰ सन्तान सुख उपाय से होगा। ४॰ मन्दिर बनाने की आशा पूरी होगी। ५॰ तीर्थ-यात्रा नहीं होगी। ६॰ गुप्त-प्रेम करती है। ७॰ सम्बन्धी धोखा नहीं देगा। ८॰ स्त्री का स्वभाव उत्तम होगा। ९॰ इच्छा पूरी होने में सन्देह है। १०॰ कन्या होगी। ११॰ दिन शुभ नहीं रहेगा। १२॰ यह वर्ष शुभ रहेगा। १३॰ कूप-निर्माण नहीं होगा। १४॰ भाइयों से नहीं बनेगी। १५॰ यात्रा से लाभ पाना कठिन है। १६॰ परदेशी देर से आयेगा। चिन्ता न करें। |
शिव-प्रश्न-फल १॰ नौकरी शीघ्र मिल जायेगी। २॰ भाग्योदय में देर है। ३॰ मुकदमे में हार होगी। ४॰ संतान सुख की आशा पूरी होगी। ५॰ मन्दिर नहीं बन सकेगा। ६॰ तीर्थ-यात्रा नहीं होगी। ७॰ प्रेम करती है। ८॰ सम्बन्धी धोखा देगा। सावधान। ९॰ स्त्री के स्वभाव से मेल मिल जायेगा। १०॰ इच्छा पूरी होगी। ११॰ पुत्र होगा। १२॰ दिन शुभ है। १३॰ यह वर्ष उत्तम नहीं बितेगा। १४॰ कूप-निर्माण की आशा पूरी होगी। १५॰ भाइयों से बननी कठिन है। १६॰ यात्रा से लाभ मिलेगा। |
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| इन्द्र-प्रश्न-फल १॰ तरक्की के योग अच्छे हैं। २॰ नौकरी प्रयत्न से मिलेगी। ३॰ भाग्योदय अभी नहीं हो सकेगा। ४॰ मुकदमे में जीत होगी। ५॰ संतान-सुख उपाय से मिलेगा। ६॰ मन्दिर की आशा पूरी होगी। ७॰ तीर्थ-यात्रा कर सकोगे। ८॰ प्रेम नहीं करती, दिखावटी प्रेम है। ९॰ सम्बन्धी गुप्त चाल चलेगा। १०॰ स्त्री का स्वभाव अच्छा रहेगा। ११॰ इच्छा पूरी होने में सन्देह है। १२॰ कन्या होगी। १३॰ दिन मध्यम है। १४॰ यह वर्ष कठिनाई के साथ बीतेगा। १५॰ कूप-निर्माण देरी से होगा। १६॰ भाइयों से अच्छा मेल रहेगा। |
अग्नि-प्रश्न-फल १॰ खेती से लाभ होगा। २॰ तरक्की के योग में देर है। ३॰ नौकरी नहीं मिलेगी। ४॰ भाग्योदय शीघ्र ही होगा। ५॰ मुकदमे की जीत में सन्देह है। ६॰ सन्तान-सुख देर से होगा। ७॰ मन्दिर मित्र की सहायता से बनेगा। ८॰ तीर्थ-यात्रा होने में सन्देह है। ९॰ प्रेम का दिखावा ही अच्छा है। १०॰ सम्बन्धी धोखा नहीं देगा। ११॰ स्त्री का स्वभाव अच्छा नहीं होगा। १२॰ इच्छा पूरी नहीं हो सकेगी। १३॰ पुत्र होगा। १४॰ दिन उत्तम है। १५॰ यह वर्ष उत्तम है। १६॰ कूप-निर्माण की आशा पूरी होगी। |
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| वायु-प्रश्न-फल १॰ मकान बनाने की कामना पूरी होगी। २॰ खेती से लाभ कम होगा। ३॰ तरक्की का योग नहीं है। ४॰ नौकरी काफी प्रयत्न से ही मिलेगी। ५॰ भाग्योदय शीघ्र होने वाला है। ६॰ मुकदमे में जीत पाना कठिन है। ७॰ संतान का सुख मिलेगा। ८॰ मन्दिर बनाने की कामना पूरी होगी। ९॰ विघ्न के कारण तीर्थ-यात्रा नहीं होगी। १०॰ प्रेम करती है। ११॰ सम्बन्धी धोखा देने में नहीं चूकेगा। १२॰ स्त्री का स्वभाव कुछ चिड़चिड़ा है। १३॰ इच्छा पूरी होगी। १४॰ कन्या होगी। १५॰ दिन अच्छा नहीं है। १६॰ यह वर्ष मध्यम रहेगा। |
सूर्य-प्रश्न-फल १॰ पास हो जाओगे। २॰ मकान के बनने में देर है। ३॰ खेती से लाभ नहीं होगा। ४॰ तरक्की शीघ्र होगी। ५॰ नौकरी अभी नहीं मिलेगी। ६॰ भाग्योदय अभी देर से होगा। ७॰ मुकदमा जीत जाओगे। ८॰ संतान-सुख में बाधा, गोपाल जप कराओ। ९॰ मन्दिर-निर्माण देर से होगा। १०॰ तीर्थ-यात्रा सकुशल होगी। ११॰ प्रेम दिखावटी है। १२॰ सम्बन्धी धोखा नहीं देगा। १३॰ स्त्री का स्वभाव उत्तम रहेगा। १४॰ इच्छा पूरी नहीं होगी। १५॰ पुत्र होगा। १६॰ दिन शुभ है। |
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| चन्द्रमा-प्रश्न-फल १॰ विद्या प्राप्त करोगे। २॰ पास होने में सन्देह है। ३॰ मकान नहीं बन सकेगा। ४॰ खेती से लाभ मिलेगा। ५॰ तरक्की का योग अभी नहीं है। ६॰ नौकरी मिल जायेगी। ७॰ भाग्य का सितारा शीघ्र चमकेगा। ८॰ मुकदमा जीतने में सन्देह है। ९॰ संतान-सुख देरी से होगा। १०॰ मन्दिर नहीं बन सकेगा। ११॰ तीर्थ-यात्रा नहीं कर सकोगे। १२॰ प्रेम का चक्कर हानिकारक है। १३॰ सम्बन्धी धोखा देगा। सावधान। १४॰ स्त्री का स्वभाव अच्छा नहीं है। १५॰ इच्छा पूरी होने में सन्देह है। १६॰ कन्या होगी। |
वसु-प्रश्न-फल १॰ जीवन सुखपूर्वक व्यतीत होगा। २॰ विद्या थोड़ी प्राप्त कर सकोगे। ३॰ फेल हो जाओगे। ४॰ मकान की आशा पूरी नहीं होगी। ५॰ खेती से लाभ कम होगा। ६॰ तरक्की का योग बन रहा है। ७॰ नौकरी मिलने में देर है। ८॰ भाग्योदय का समय नजदीक है। ९॰ मुकदमे में जीत निश्चित है। १०॰ सन्तान सुख नहीं मिलेगा। ११॰ मन्दिर अभी नहीं बनेगा। १२॰ तीर्थयात्रा की आशा पूरी नहीं होगी। १३॰ शुद्ध प्रेम करती है। १४॰ सम्बन्धी धोखा नहीं देगा। १५॰ स्त्री उत्तम स्वभाव की मिलेगी। १६॰ इच्छा पूरी होगी। |
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वरुण-प्रश्न-फल १०॰ मुकदमे में जीत होने में सन्देह है। |
पृथ्वी-प्रश्न-फल १॰ गड़ा धन प्राप्त करोगे। २॰ सईलता मिल जाएगी। ३॰ जीवन काफी कठिनाइयों से बीतेगा। ४॰ विद्या प्राप्त करोगे। ५॰ पास होने में सन्देह है। ६॰ मकान अभी देर से बनेगा। ७॰ खेती से लाभ मिलेगा। ८॰ तरक्की अभी नहीं हो सकेगी। ९॰ नौकरी मिल जायेगी। १०॰ आपके सितारे चमकने में देर है। ११॰ मुकदमे में हार की संभावना है। १२॰ सन्तान सुख होगा। १३॰ मन्दिर अभी नहीं बन पायेगा। १४॰ तीर्थ-यात्रा नहीं हो सकेगी। १५॰ दिखावटी प्रेम करती है। १६॰ सम्बन्धी धोखा नहीं देगा। |
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| अश्वनी-प्रश्न-फल १॰ विवाह हो जायेगा। २॰ गड़ा धन विशेष उपाय द्वारा मिले। ३॰ जीवन में सफलता पाना कठिन है। ४॰ जीवन उत्तम प्रकार से बीतेगा। ५॰ विद्या प्राप्त नहीं कर सकोगे। ६॰ पास नहीं हो सकोगे। ७॰ मकान की कामना देर से पूरी होगी। ८॰ खेती से लाभ नहीं होगा। ९॰ तरक्की के योग में देरी है। १०॰ नौकरी मिल जायेगी। ११॰ भाग्योदय निकट भविष्य में होगा। १२॰ मुकदमे में जीत होगी। १३॰ सन्तान-सुख उपाय से होगा। १४॰ मन्दिर अभी नहीं बनेगा। १५॰ तीर्थ-यात्रा नहीं हो सकेगी। १६॰ शुद्ध प्रेम करती है। |
मंगल-प्रश्न-फल १॰ बीमार अच्छा हो जायेगा। २॰ विवाह होने में सन्देह है। ३॰ गड़ा धन गृह-देव की पूजा से मिले। ४॰ जीवन में सफलता मिलेगी। ५॰ जीवन मध्यम श्रेणी में बीतेगा। ६॰ विद्या प्राप्त कर लोगे। ७॰ पास हो जाओगे। ८॰ मकान शीघ्र बनेगा। ९॰ खेती में लाभ मिलेगा। १०॰ तरक्की अभी नहीं हो सकेगी। ११॰ नौकरी मिलने में सन्देह है। १२॰ भाग्योदय अभी नहीं होगा। १३॰ मुकदमे की जीत में सन्देह है। १४॰ सन्तान-सुख मिलेगा, चिन्ता छोड़ दो। १५॰ मन्दिर-निर्माण शीघ्र होगा। १६॰ तीर्थ-यात्रा की आशा पूरी होगी। |
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| बुध-प्रश्न-फल १॰ स्वप्न का फल उत्तम है। २॰ बीमार देर से अच्छा होगा। ३॰ विवाह उपाय से होगा। ४॰ गड़ा धन प्राप्त होगा। ५॰ जीवन में सफलता नहं मिलेगी। ६॰ जीवन में कठिनाइयां विशेष रहेगी। ७॰ विद्या प्राप्ति शिव की पूजा से होगी। ८॰ पास होने में सन्देह है। ९॰ मकान अभी नहीं बनेगा। १०॰ खेती से लाभ मिलेगा। ११॰ तरक्की तो होगी, किन्तु देर से। १२॰ नौकरी अभी नहीं मिलेगी। १३॰ भाग्योदय शीघ्र ही होने वाला है। १४॰ मुकदमे में जीत होगी। १५॰ सन्तान-सुख उपाय से होगा। १६॰ मन्दिर अभी नहीं बनेगा। |
बृहस्पति-प्रश्न-फल १॰ तबादला शीघ्र हो जायेगा। २॰ स्वप्न का फल विशेष अच्छा नहीं है। ३॰ बीमार के ठीक होने में सन्देह है। ४॰ विवाह हो जायेगा। ५॰ गड़ा धन उपाय से मिलेगा। ६॰ जीवन में सफलता कम मिलेगी। ७॰ जीवन अच्छी तरह से बीतेगा। ८॰ विद्या प्राप्त होना कठिन है। ९॰ पास हो जाओगे, शिव पूजा करो। १०॰ मकान की कामना पूरी होगी। ११॰ खेती से पूरा लाभ नहीं मिलेगा। १२॰ तरक्की शीघ्र ही होगी। १३॰ नौकरी मिल जायेगी। १४॰ भाग्योदय अभी देर से होगा। १५॰ मुकदमे की जीत में सन्देह है। १६॰ संतान सुख नहीं मिलेगा। |
||
| शुक्र-प्रश्न-फल १॰ व्यापार में सावधानी से लाभ मिले। २॰ तबादले का योग चल रहा है। ३॰ स्वप्न का फल उत्तम है। ४॰ बीमार अच्छा हो जायेगा। ५॰ विवाह उपाय से होगा। ६॰ गड़ा धन मिलेगा। ७॰ जीवन में सफलता पाना कठिन है। ८॰ जीवन में कठिनाइयां अधिक आयेगीं। ९॰ विद्या थोड़ी प्राप्त होगी। १०॰ पास हो जाओगे। ११॰ मकान अभी देर से बनेगा। १२॰ खेती से लाभ मिलने में सन्देह है। १३॰ तरक्की अभी नहीं हो सकेगी। १४॰ नौकरी मिलने में सन्देह है। १५॰ भाग्योदय होने वाला है। १६॰ मुकदमे में जीत होगी। |
शनि-प्रश्न-फल १॰ चिन्ता अभी देर से मिटेगी। २॰ व्यापार में लाभ होगा। ३॰ तबादला नहीं होगा। ४॰ स्वप्न का फल उत्तम है। ५॰ बीमार ठीक होने में सन्देह है। ६॰ विवाह होने में सन्देह है। ७॰ गड़ा धन आसुरी-सिद्धि द्वारा मिलेगा। ८॰ जीवन में सफलता प्राप्त करोगे। ९॰ जीवन सुखमय व्यतीत होगा। १०॰ विद्या प्राप्त कर सकोगे। ११॰ पास होना मुश्किल है। १२॰ मकान अभी नहीं बन सकेगा। १३॰ खेती से लाभ नहीं मिलेगा। १४॰ तरक्की का योग अभी नहीं बनता। १५॰ नौकरी मिल जायेगी। १६॰ भाग्योदय शीघ्र होगा। |
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| राहु-प्रश्न-फल १॰ मित्र धोखा देगा, सावधान रहना। २॰ चिंता शीघ्र ही मिट जायेगी। ३॰ व्यापार से लाभ नहीं होगा। ४॰ तबादला हो जायेगा। ५॰ स्वप्न का फल अच्छा नहीं है। ६॰ बीमार अच्छा हो जायेगा। ७॰ विवाह हो जायेगा। ८॰ गड़ा धन भाग्य में नहीं है। ९॰ जीवन में सफलता कम मिलेगी। १०॰ जीवन बाधाओं से युक्त बीते। ११॰ विद्या प्राप्त नहीं हो सकेगी। १२॰ पास होने में सन्देह है। १३॰ मकान की आशा पूरी होगी। १४॰ खेती में लाभ मिलेगा। १५॰ तरक्की का योग प्रयत्न से है। १६॰ नौकरी अभी देर से मिलेगी। |
केतु-प्रश्न-फल १॰ कर्ज तो मिलेगा, किन्तु अभी देर है। २॰ मित्र से सतर्क रहें। ३॰ चिंता हनुमान की पूजा से मिटेगी। ४॰ व्यापार में लाभ होगा। ५॰ तबादला रुक जायेगा। ६॰ स्वप्न का फल मध्यम रहेगा। ७॰ बीमार अच्छा हो जायेगा। ८॰ विवाह उपाय से होगा। ९॰ गड़ा धन पितृ-पूजा से मिलेगा। १०॰ जीवन में सफलता नहीं मिलेगी। ११॰ जीवन में सफलता कम मिलेगी। १२॰ विद्या कठिन परिश्रम से प्राप्त होगी। १३॰ पास हो जाओगे। १४॰ मकान की आशा पूरी नहीं होगी। १५॰ खेती से लाभ नहीं होगा। १६॰ तरक्की में बाधा है। |
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| ध्रुव-प्रश्न-फल १॰ खोई वस्तु प्रयत्न से मिल सकेगी। २॰ कर्ज मिल जायेगा। ३॰ मित्र के साथ नहीं बनेगी। ४॰ चिन्ता शीघ्र दूर होगी। ५॰ व्यापार से लाभ नहीं हो सकेगा। ६॰ तबादला नहीं होगा। ७॰ स्वप्न का फल उत्तम है। ८॰ बीमार के अच्छे होने में सन्देह है। ९॰ विवाह देर से होगा। १०॰ गड़ा धन मिलने में सन्देह है। ११॰ जीवन में सफलता कष्ट से मिलेगी। १२॰ जीवन में सुख नहीं मिलेगा। १३॰ विद्या प्राप्त करोगे। १४॰ पास होने में सन्देह है। १५॰ मकान अभी नहीं बन पायेगा। १६॰ खेती से लाभ मिलेगा। |
यम-प्रश्न-फल १॰ परदेशी रास्ते में चल रहा है। २॰ खोई वस्तु मिल जायेगी। ३॰ कर्ज इस समय मिलना मुश्किल है। ४॰ मित्र का साथ अच्छी बन जायेगी। ५॰ चिन्ता अभी दूर नहीं होगी। ६॰ व्यापार से लाभ रहेगा। ७॰ तबादला हो जायेगा। ८॰ स्वप्न का फल मध्यम है। ९॰ बीमारी अच्छी हो जायेगी। १०॰ विवाह हो जायेगा। ११॰ गड़ा धन प्राप्त होगा। १२॰ जीवन में सफल होना कठिन है। १३॰ जीवन सुखपूर्वक व्यतीत करोगे। १४॰ विद्या प्राप्त नहीं कर सकोगे। १५॰ पास नहीं होगें। १६॰ तरक्की में बाधा है। |
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| विश्वेदेवा-प्रश्न-फल १॰ यात्रा लाभदायी रहेगी। २॰ परदेशी अभी नहीं आ रहा है। ३॰ खोई वस्तु नहीं मिलेगी। ४॰ कर्ज देर से मिलेगा। ५॰ मित्र के साथ नहीं बन सकेगी। ६॰ चिन्ता सब दूर हो जायेगी। ७॰ व्यापार में लाभ मिलना कठिन है। ८॰ तबादला नहीं हो सकेगा। ९॰ स्वप्न का फल अशुभ है। १०॰ बीमार अच्छा नहीं होगा। ११॰ विवाह होने में सन्देह है। १२॰ गड़ा धन नहीं मिलेगा। १३॰ जीवन में अच्छी सफलता मिलेगी। १४॰ जीवन में कष्ट अधिक मिले। १५॰ शिक्षा प्राप्त करोगे। १६॰ पास हो जाओगे। |
यक्ष-प्रश्न-फल १॰ भाइयों में बननी मुश्किल है। २॰ यात्रा से लाभ कम मिले। ३॰ परदेशी शीघ्र ही आ जायेगा। ४॰ खोई वस्तु मिल जायेगी। ५॰ कर्जा नहीं मिलेगा। ६॰ मित्र के साथ अच्छा मेल होगा। ७॰ चिन्ता अभी नहीं मिटेगी। ८॰ व्यापार से लाभ मिलेगा। ९॰ तबादला होने का योग हैं। १०॰ स्वप्न का फल शुभ है। ११॰ बीमार अच्छा हो जायेगा। १२॰ विवाह उपाय से होगा। १३॰ गड़ा धन शीघ्र प्राप्त होगा। १४॰ जीवन में सफल होना मुश्किल है। १५॰ जीवन सुखपूर्वक बीतेगा। १६॰ विद्या पूजा से प्राप्त होगी। |
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| भैरव-प्रश्न-फल १॰ कूप-निर्माण की कामना पूरी होगी। २॰ भाइयों में अच्छी बन जायेगी। ३॰ यात्रा से लाभ नहीं रहेगा। ४॰ परदेशी अभी नहीं आयेगा। ५॰ खोयी वस्तु प्रयत्न से मिलेगी। ६॰ कर्ज मिल सकेगा। ७॰ मित्र से बननी कठिन है। ८॰ चिन्ता मिटेगी, देव-पूजा करो। ९॰ व्यापार में लाभ पाना मुश्किल है। १०॰ तबादला प्रयत्न से होगा। ११॰ स्वप्न का फल उत्तम नहीं है। १२॰ बीमार अच्छा होना कठिन है। १३॰ विवाह होगा, चिन्ता करना व्यर्थ है। १४॰ गड़ा धन नहीं मिलेगा। १५॰ जीवन में अच्छी सफलता मिलेगी। १६॰ जीवन में विशेष बाधाएं आयेंगी। |
वासुकि-प्रश्न-फल १॰ यह वर्ष मध्यम रहेगा। २॰ कुआं बन जायेगा। ३॰ भाइयों से नहीं बनेगी। ४॰ यात्रा में लाभ मिलेगा। ५॰ परदेशी शीघ्र ही आ जायेगा। ६॰ खोई वस्तु मिलेगी। ७॰ कर्ज मिलेगा। ८॰ मित्र धोखा देगा, सावधान रहना। ९॰ चिन्ता मिट जायेगी। १०॰ व्यापार से लाभ मिलेगा। ११॰ तबादला हो जायेगा। १२॰ स्वप्न का फल शुभ है। १३॰ बीमार के अच्छे होने में सन्देह है। १४॰ विवाह उपाय से हो सकेगा। १५॰ गड़ा धन पितृ-पूजा से मिल सकेगा। १६॰ जीवन में सफलता कम मिलेगी। |
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| कुबेर-प्रश्न-फल १॰ दिन शुभ नहीम है। २॰ यह वर्ष अच्छा रहेगा। ३॰ कुआं नहीं बन सकेगा। ४॰ भाइयों में अच्छी बन जायेगी। ५॰ यात्रा से लाभ नहीं मिलेगा। ६॰ परदेशी बीमार है, अभी नहीं आयेगा। ७॰ खोयी वस्तु मिलने में सन्देह है। ८॰ कर्ज नहीं मिलेगा। ९॰ मित्र के साथ सावधानी से कार्य करो। १०॰ चिन्ता अभी दूर नहीं होगी। ११॰ व्यापार से लाभ मिलना कठिन है। १२॰ तबादला नहीं होगा। १३॰ स्वप्न का फल शुभ नहीं है। १४॰ बीमार अच्छा हो जायेगा। १५॰ विवाह उपाय से होगा। १६॰ गड़ा धन शीघ्र प्राप्त हो जायेगा। |
मित्र-प्रश्न-फल १॰ पुत्र होगा। २॰ दिन शुभ है। ३॰ यह वर्ष उत्तम है। ४॰ कुआं बन जायेगा। ५॰ भाइयों से बिगाड़ होगा। ६॰ यात्रा से लाभ कम है। ७॰ परदेशी लौट रहा है। ८॰ खोयी वस्तु नहीं मिलेगी। ९॰ कर्ज कठिनाई से मिलेगा। १०॰ मित्र के साथ अच्छी बन जायेगी। ११॰ चिन्ता मिट जायेगी। १२॰ व्यापार से लाभ नहीं मिलेगा। १३॰ तबादला हो जायेगा। १४॰ स्वप्न का फल शुभ है। १५॰ बीमार ले अच्छा होने में सन्देह है। १६॰ विवाह शीघ्र ही हो जायेगा। |
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| जयन्त-प्रश्न-फल १॰ इच्छा देर से पूरी होगी। २॰ कन्या होगी। ३॰ दिन मध्यम रहेगा। ४॰ यह वर्ष उत्तम रहेगा। ५॰ कुआं बनने में रुकावटें ज्यादा है। ६॰ भाइयों से मेल-मिलाप रहेगा। ७॰ यात्रा से लाभ रहेगा। ८॰ परदेशी अभी नहीं आयेगा। ९॰ खोई वस्तु मिलने में सन्देह है। १०॰ कर्ज नहीं मिलेगा। ११॰ मित्र के साथ बनना कठिन है। १२॰ चिन्ता बढ़ जायेगी। १३॰ व्यापार में लाभ मिलना कठिन है। १४॰ तबादला होने में सन्देह है। १५॰ स्वप्न का फल अच्छा नहीं है। १६॰ बीमार शीघ्र ही अच्छा होगा। |
शेष-प्रश्न-फल १॰ सम्बन्धी धोखा नहीं देगा। २॰ स्त्री तेज स्वभाव की मिलेगी। ३॰ इच्छा पूरी होने में सन्देह है। ४॰ कन्या होगी। ५॰ दिन मध्यम रहेगा। ६॰ यह वर्ष उत्तम रहेगा। ७॰ कुआं बनाने में अचानक बाधा पड़े। ८॰ भाइयों से बननी मुश्किल है। ९॰ यात्रा से लाभ नहीं मिलेगा। १०॰ परदेशी शीघ्र घर आ जायेगा। ११॰ खोई वस्तु मिलने में सन्देह है। १२॰ कर्ज अभी नहीं मिलेगा। १३॰ मित्र के साथ अच्छी बन जायेगी। १४॰ चिन्ता अभी दूर नहीं होगी। १५॰ व्यापार से लाभ मिलेगा। १६॰ तबादले की आशा देर से पूरी होगी। |
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| तक्षक-प्रश्न-फल १॰ स्त्री सरल स्वभाव की मिलेगी। २॰ इच्छा पूरी होगी। ३॰ पुत्र होगा। ४॰ दिन शुभ रहेगा। ५॰ यह वर्ष अच्छा रहेगा। ६॰ कुआं बन जायेगा। ७॰ भाइयों से अनबन रहेगी। ८॰ यात्रा में लाभ मिलना कठिन है। ९॰ परदेशी अभी देर से आयेगा। १०॰ खोयी वस्तु देर से मिलेगी। ११॰ कर्ज देर से मिलेगा। १२॰ मित्र के साथ नही बनेगी। १३॰ चिन्ता शीघ्र दूर होगी। १४॰ व्यापार से लाभ नहीं मिलेगा। १५॰ तबादले की आशा पूरी होगी। १६॰ स्वप्न का फल उत्तम होगा। |
काम-प्रश्न-फल १॰ गुप्त-प्रेम करती है। २॰ सम्बन्धी से धोखे की उम्मीद कम है। ३॰ स्त्री सरल स्वभाव की मिलेगी। ४॰ इच्छा पूरी होगी। ५॰ पुत्र होगा। ६॰ दिन शुभ नहीं है। ७॰ यह वर्ष मध्यम रहेगा। ८॰ गृह-निर्माण की कामना पूरी होगी। ९॰ भाइयों में साधारण मेल रहेगा। १०॰ यात्रा से लाभ होगा। ११॰ परदेशी अभी नहीं आ रहा है। १२॰ खोई वस्तु मिल जायेगी। १३॰ कर्ज मिल जायेगा। १४॰ मित्र के साथ नहीं बनेगी। १५॰ चिंता शीघ्र मिट जायेगी। १६॰ व्यापार से हानि होगी। |
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| काल-प्रश्न-फल १॰ तीर्थ-यात्रा अभी नहीं हो सकेगी। २॰ शुद्ध प्रेम करती है। ३॰ सम्बन्धी धोखा दे सकता है। ४॰ स्त्री अच्छे स्वभाव की नहीं मिलेगी। ५॰ इच्छा पूरी होने में देर है। ६॰ कन्या होगी। ७॰ दिन शुभ रहेगा। ८॰ यह वर्ष अच्छा नहीं रहेगा। ९॰ कूप अभी देरी से बनेगा। १०॰ भाइयों में मेल कम रहेगा। ११॰ यात्रा से लाभ नहीं रहेगा। १२॰ परदेशी अभी नहीं आयेगा। १३॰ खोई वस्तु मिलना कठिन है। १४॰ कर्ज मिलने में सन्देह है। १५॰ मित्र के साथ अच्छी बन जायेगी। १६॰ चिंता कुछ समय बाद मिटेगी। |
अनन्त-प्रश्न-फल १॰ मन्दिर बनवाने की आशा पूरी होगी। २॰ तीर्थ-यात्रा कर सकोगे। ३॰ प्रेम नहीं करती है। ४॰ सम्बन्धी धोखा नहीं देगा। ५॰ स्त्री उत्तम स्वभाव की मिलेगी। ६॰ इच्छा पूरी होगी। ७॰ पुत्र होगा। ८॰ दिन शुभ नहीं है। ९॰ यह वर्ष मध्यम है। १०॰ कूप-निर्माण की आशा शीघ्र पूरी होगी। ११॰ भाइयों से नहीं बनेगी। १२॰ यात्रा से लाभ मिलेगा। १३॰ परदेशी आ रहा है। १४॰ खोयी वस्तु नहीं मिल सकेगी। १५॰ कर्ज शीघ्र ही मिल जायेगा। १६॰ मित्र से बनना मुश्किल है, सावधान। |
March 14, 2009
by AjAy SiNgH
रमल प्रश्नावली
इस प्रश्नावली का तरीका है कि चंदन की लकड़ी का चौकोर पासा बनाकर उस पर १, २, ३, ४ खुदवा लें। फिर अपने कार्य का चिंतन करते हुए तीन बार पासा छोड़ें। उसका जो अंक आये, उसी अंक पर फल देखें। यदि किसी के पास पासा नहीं हो तो, नीचे दी गई सारणी में अनामिका अंगुली रखकर उसका फल देखें। अथवा सम्बन्धित अंक के ऊपर माउस का पाइंटर ले जाने पर Tooltip में स्वतः फल नजर आयेगा।
| १११ | १३१ | २११ | २३१ | ३११ | ३३१ | ४११ | ४३१ |
| ११२ | १३२ | २१२ | २३२ | ३१२ | ३३२ | ४१२ | ४३२ |
| ११३ | १३३ | २१३ | २३३ | ३१३ | ३३३ | ४१३ | ४३३ |
| ११४ | १३४ | २१४ | २३४ | ३१४ | ३३४ | ४१४ | ४३४ |
| १२१ | १४१ | २२१ | २४१ | ३२१ | ३४१ | ४२१ | ४४१ |
| १२२ | १४२ | २२२ | २४२ | ३२२ | ३४२ | ४२२ | ४४२ |
| १२३ | १४३ | २२३ | २४३ | ३२३ | ३४३ | ४२३ | ४४३ |
| १२४ | १४४ | २२४ | २४४ | ३२४ | ३४४ | ४२४ | ४४४ |
रमल प्रश्नावली
१११॰ मंगल भवन अमंगल हारी, पूरी होगी मनोकामना थारी।
११२॰ इष्ट देव का ध्यान धरोगे, मन इच्छा सब काम करोगे।
११३॰ होत काम में हुआ अंधेरा, बैरी पहुंच गया है तेरा।
११४॰ झटपट करो देर नहीं लाओ, यह अवसर फेर नहीं पाओ।
१२१॰ जो तुम मन में नहीं उपाई, होगा काम ढील से भाई।
१२२॰ आगे विघ्न है बड़ा भारी, ईश्वर राखे लाज तुम्हारी।
१२३॰ संकट हटे सर्व सुख आया, दिन-दिन दुगुनी बढ़े माया।
१२४॰ वा शुभ काम करो दिन राती, पांच जिमादे गोती नाती।
१३१॰ कपट भेद है मन में उसके, करि विश्वास जाय तु जिसके।
१३२॰ होगी फतह देर नहीं लाओ, सूरज से तुम विनय सुनाओ।
१३३॰ दुविधा हटे सर्व सुख पाओ, गुरु गोविंद से ध्यान लगाओ।
१३४॰ बार-बार समझाऊँ थाने, आज भला नहीं दीखे म्हाने।
१४१॰ विपत्तियाँ बीत गयी सब पाछे, अब तो दिन आवेंगे आछे।
१४२॰ अब सुनता ना कोई तेरी, घर में पैठि रहा हऔ बेरी।
१४३॰ धन परिवार सदा सुखदाई, कर्म विपाक देख ले भाई।
१४४॰ रात दिना की चिंता भारी, कुछ दिन में मिट जाये थारी।
२११॰ जर जमीन होवे फिर होवे, चिंता करि तन को क्यों खोवे।
२१२॰ यह तो काम बड़ा दुखदाई, कर्म-विपाक देख लो भाई।
२१३॰ सत्य बात तुम सुन लो म्हारी, तिगरी लाग रही है थारी।
२१४॰ हिम्मत बड़ी भरोसा खोटा, कर्म-विपाक देख दुख मोटा।
२२१॰ कितना ही गुण कर मनमाहीं, यश तुमको मिलने का नाहीं।
२२२॰ होगी फतह देर नहीं लाओ, रविवार को व्रत बनाओ।
२२३॰ संकट देखि डरे क्यों भाई, ईश्वर थारी करे सहाई।
२२४॰ धर्म हार धन कोई खाओ, मन अपने में क्यों घबराओ।
२३१॰ सोच समझ के करना भाई, बिन सोचे होता दुखदाई।
२३२॰ रस्ते में जो भूखा टोहवो, भोजन देके निर्भय सोवो।
२३३॰ भली बुरी उसके ही हाथ, निर्धनी धनी बना वही नाथ।
२३४॰ यह अवसर करने का नाहीं, चुप बैठि रहो घर माहीं।
२४१॰ वह तुमसे लेने को डोले, इस कारण मुख मीठा बोले।
२४२॰ धीरज धरि रहो उर माहीं, गयी वस्तु घर आवे नाहीं।
२४३॰ किया कबूल भूलि गया भाई, वो ही थारी करे सहाई।
२४४॰ उदय पाप हो गये अब सारे, कर्म-विपाक देखिल्यो थारे।
३११॰ तीन बार ऊकी है तेरी, पीछे लाग रहा है बैरी।
३१२॰ करि कुछ यतन देर नहीं करना, करले जाप नहीं दुख भरना।
३१३॰ जो तुम मन में नई उपाई, होगा काम ढील से भाई।
३१४॰ करि विश्वास सत्य सुनि भाई, संकट मिटे होय सुखदाई।
३२१॰ यह तो बात नई बनि आई, कर्म-विपाक देख लो भाई।
३२२॰ करि विश्वास सत्य सुनि भाई, संकट मिटे होय सुखदाई।
३२३॰ करना हो सो जल्दी करिइ, ध्यान गुरु का हृदय धरिए।
३२४॰ तुम तो सबकी करो भलाई, ईश्वर राखै लाज सदाई।
३३१॰ जस तुम को मिलना नहीं भाई, चाहे जितनी करो भलाई।
३३२॰ कर ले काम देर नहीं करना, ईश्वर ध्यान हिये में धरना।
३३३॰ देखि चंद्रमा काम करोगे, नित नये मंगल मोद भरोगे।
३३४॰ जिस नर की तुम करते आशा, उसका कौन करे विश्वासा।
३४१॰ तुम जानो अपना सा मनकी, बुद्धि बदलि रही उस तन की।
३४२॰ अब तो समझि देखि मनमाहीं, घात ग्रह बिन होता नाहीं।
३४३॰ करिले यतन काम है नीका, अब तो फिकर मिटेगा जी का।
३४४॰ दुर्गा पठित कराना भाई, तो यह संकट वेग नसाई।
४११॰ चुपके बैठि रहो घर माहीं, यह अवसर करने का नाहीं।
४१२॰ करि विश्वास जाय जो कोई, उसकी हानि कभी नहीं होई।
४१३॰ यह सब दोष कर्म का भाई, कर्म-विपाक देख लो भाई।
४१४॰ मन अपने को डाटो भाई, मन के डटे सर्व सुखदाई।
४२१॰ शुभ आचरण बने रहो भाई, तो सुख सम्पत्ति रहे सदाई।
४२२॰ अपने मन में तुम्हीं विचारो, भूलि गये सो बेगि संभारो।
४२३॰ ये है दोष कर्म के भाई, करि कुछ जाय लेय छुटवाई।
४२४॰ मनि अपने को राखि जचाया, अब तो दिन अच्छे बन आया।
४३१॰ करिले यतन देर नहीं करना, इष्ट देव की ले ले सरना।
४३२॰ वो तोरी सब भली करेगा, उस ही से सब काम सरेगा।
४३३॰ अब तो फिकर तजो तुम भाई, कुछ दिन गये होय सुखदाई।
४३४॰ धीरज धरो फिकर तजि डारो, है ईश्वर को बड़ो सहारो।
४४१॰ नीच निचाई नहीं तजेंगे, फिर भी सज्जन राम भजेंगे।
४४२॰ मन अपने करो विचारा, इस तन को देखो रखवारा।
४४३॰ रोस देव का तुम पर भारी, पहिले उसकी करो मनुहारी।
४४४॰ ठहर-ठहर कर जागे जोती, कुछ दिन गये सिद्ध सब होती।
सौभाग्याष्टोत्तरशतनामस्तोत्र
किसी भी श्रद्धा-विश्वास-युक्त स्त्री के द्वारा स्नानादि से शुद्ध होकर सूर्योदय से पहले नीचे लिखे मन्त्र की १० माला प्रतिदिन जप किये जाने से घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है तथा उसका सौभाग्य बना रहता है। किसी शुभ दिन जप का आरम्भ करना चाहिये तथा प्रतिवर्ष चैत्र और आश्विन के नवरात्रों में विधिपूर्वक हवन करवा कर यथाशक्ति कुमारी, वटुक आदि को भोजनादि से संतुष्ट करना चाहिये। इस मन्त्र के हवन में समिधा केवल वट-वृक्ष की लेनी चाहिये।
मन्त्रः- ” ॐॐ ह्रीं ॐ क्रीं ह्रीं ॐ स्वाहा।”
साथ ही नीचे लिखे “सौभाग्याष्टित्तरशतनामस्तोत्र” का प्रतिदिन कम-से-कम एक पाठ करना चाहिये। इससे सौभाग्य की रक्षा होती है।
सौभाग्याष्टित्तरशतनामस्तोत्र
निशम्यैतज्जामदग्न्यो माहात्म्यं सर्वतोऽधिकम्।
स्तोत्रस्य भूयः पप्रच्छ दत्तात्रेयं गुरुत्तमम्।।१
भगवंस्त्वन्मुखाम्भोजनिर्गमद्वाक्सुधारसम्।
पिबतः श्रोत्रमुखतो वर्धतेऽनुरक्षणं तृषा।।२
अष्टोत्तरशतं नाम्नां श्रीदेव्या यत्प्रसादतः।
कामः सम्प्राप्तवाँल्लोके सौभाग्यं सर्वमोहनम्।।३
सौभाग्यविद्यावर्णानामुद्धारो यत्र संस्थितः।
तत्समाचक्ष्व भगवन् कृपया मयि सेवके।।४
निशम्यैवं भार्गवोक्तिं दत्तात्रेयो दयानिधिः।
प्रोवाच भार्गवं रामं मधुराक्षरपूर्वकम्।।५
श्रृणु भार्गव यत्पृष्टं नाम्नामष्टोत्तरं शतम्।
श्रीविद्यावर्णरत्नानां निधानमिव संस्थितम्।।६
श्रीदेव्या बहुधा सन्ति नामानि श्रृणु भार्गव।
सहस्त्रशतसंख्यानि पुराणेष्वागमेषु च।।७
तेषु सारतरं ह्येतत् सौभाग्याष्टोत्तरात्मकम्।
यदुवाच शिवः पूर्वं भवान्यै बहुधार्थितः।।८
सौभाग्याष्टोत्तरशतनामस्तोत्रस्य भार्गव।
ऋषिरुक्तः शिवश्छन्दोऽनुष्टुप् श्रीललिताम्बिका।।९
देवता विन्यसेत् कूटत्रयेणावर्त्य सर्वतः।
ध्यात्वा सम्पूज्य मनसा स्तोत्रमेतदुदीरयेत्।।१०
।।अथ नाममन्त्राः।।
ॐ कामेश्वरी कामशक्तिः कामसौभाग्यदायिनी।
कामरुपा कामकला कामिनी कमलासना।।११
कमला कल्पनाहीना कमनीय कलावती।
कमलाभारतीसेव्या कल्पिताशेषसंसृतिः।।१२
अनुत्तरानघानन्ताद्भुतरुपानलोद्भवा।
अतिलोकचरित्रातिसुन्दर्यतिशुभप्रदा।।१३
अघहन्त्र्यतिविस्तारार्चनतुष्टामितप्रभा।
एकरुपैकवीरैकनाथैकान्तार्चनप्रिया।।१४
एकैकभावतुष्टैकरसैकान्तजनप्रिया।
एधमानप्रभावैधद्भक्तपातकनाशिनी।।१५
एलामोदमुखैनोऽद्रिशक्रायुधसमस्थितिः।
ईहाशून्येप्सितेशादिसेव्येशानवरांगना।।१६
ईश्वराज्ञापिकेकारभाव्येप्सितफलप्रदा।
ईशानेतिहरेक्षेषदरुणाक्षीश्वरेश्वरी।।१७
ललिता ललनारुपा लयहीना लसत्तनुः।
लयसर्वा लयक्षोणिर्लयकर्त्री लयात्मिका।।१८
लघिमा लघुमध्याढ्या ललमाना लघुद्रुता।
हयारुढा हतामित्रा हरकान्ता हरिस्तुता।।१९
हयग्रीवेष्टदा हालाप्रिया हर्षसमुद्धता।
हर्षणा हल्लकाभांगी हस्त्यन्तैश्वर्यदायिनी।।२०
हलहस्तार्चितपदा हविर्दानप्रसादिनी।
रामा रामार्चिता राज्ञी रम्या रवमयी रतिः।।२१
रक्षिणी रमणी राका रमणीमण्डलप्रिया।
रक्षिताखिललोकेशा रक्षोगणनिषूदिनी।।२२
अम्बान्तकारिण्यम्भोजप्रियान्तभयंकरी।
अम्बुरुपाम्बुजकराम्बुजजातवरप्रदा।।२३
अन्तःपूजाप्रियान्तःस्थरुपिण्यन्तर्वचोमयी।
अन्तकारातिवामांकस्थितान्तस्सुखरुपिणी।।२४
सर्वज्ञा सर्वगा सारा समा समसुखा सती।
संततिः संतता सोमा सर्वा सांख्या सनातनी ॐ।।२५
।।फलश्रुति।।
एतत् ते कथितं राम नाम्नामष्टोत्तरं शतम्।
अतिगोप्यमिदं नाम्नां सर्वतः सारमुद्धृतम्।।२६
एतस्य सदृशं स्तोत्रं त्रिषु लोकेषु दुर्लभम्।
अप्रकाश्यमभक्तानां पुरतो देवताद्विषाम्।।२७
एतत् सदाशिवो नित्यं पठन्त्यन्ये हरादयः।
एतत्प्भावात् कंदर्पस्त्रैलोक्यं जयति क्षणात्।।२८
सौभाग्याष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं मनोहरम्।
यस्त्रिसंध्यं पठेन्नित्यं न तस्य भुवि दुर्लभम्।।२९
श्रीविद्योपासनवतामेतदावश्यकं मतम्।
सकृदेतत् प्रपठतां नान्यत् कर्म विलुप्यते।।३०
अपठित्वा स्तोत्रमिदं नित्यं नैमित्तिकं कृतम्।
व्यर्थीभवति नग्नेन कृतं कर्म यथा तथा।।३१
सहस्त्रनामपाठादावशक्तस्त्वेतदीरयेत्।
सहस्त्रनामपाठस्य फलं शतगुणं भवेत्।।३२
सहस्त्रधा पठित्वा तु वीक्षणान्नाशयेद्रिपून्।
करवीररक्तपुष्पैर्हुत्वा लोकान् वशं नयेत्।।३३
स्तम्भेत् पीतकुसुमैर्णीलैरुच्चाटयेद् रिपून्।
मरिचैर्विद्वेषणाय लवंगैर्व्याधिनाशने।।३४
सुवासिनीर्ब्राह्मणान् वा भोजयेद् यस्तु नामभिः।
यश्च पुष्पैः फलैर्वापि पूजयेत् प्रतिनामभिः।३५
चक्रराजेऽथवान्यत्र स वसेच्छ्रीपुरे चिरम्।
यः सदाऽऽवर्तयन्नास्ते नामाष्टशतमुत्तमम्।।३६
तस्य श्रीललिता राज्ञी प्रसन्ना वाञ्छितप्रदा।
एतत्ते कथितं राम श्रृणु त्वं प्रकृतं ब्रुवे।।३७
।।श्रीत्रिपुरारहस्ये श्रीसौभाग्याष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रं।।

