Category Archives: यन्त्र-मन्त्र-तन्त्र

visit here

my further articles will publish only on http://vadicjagat.com., so please visit here VADICJAGAT.COM

सौभाग्याष्टोत्तरशतनामस्तोत्र

सौभाग्याष्टोत्तरशतनामस्तोत्र
किसी भी श्रद्धा-विश्वास-युक्त स्त्री के द्वारा स्नानादि से शुद्ध होकर सूर्योदय से पहले नीचे लिखे मन्त्र की १० माला प्रतिदिन जप किये जाने से घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है तथा उसका सौभाग्य बना रहता है। किसी शुभ दिन जप का आरम्भ करना चाहिये तथा प्रतिवर्ष चैत्र और आश्विन के नवरात्रों में विधिपूर्वक हवन [...]

सुख-शान्ति-दायक महा-लक्ष्मी महा-मन्त्र प्रयोग

सुख-शान्ति-दायक महा-लक्ष्मी महा-मन्त्र प्रयोग
विनियोगः-
ॐ अस्य श्रीपञ्च-दश-ऋचस्य श्री-सूक्तस्य श्रीआनन्द-कर्दम-चिक्लीतेन्दिरा-सुता ऋषयः, अनुष्टुप्-वृहति-प्रस्तार-पंक्ति-छन्दांसि, श्रीमहालक्ष्मी देवताः, श्रीमहा-लक्ष्मी-प्रसाद-सिद्धयर्थे राज-वश्यार्थे सर्व-स्त्री-पुरुष-वश्यार्थे महा-मन्त्र-जपे विनियोगः।
ऋष्यादि-न्यासः-
श्रीआनन्द-कर्दम-चिक्लीतेन्दिरा-सुता ऋषिभ्यो नमः शिरसि। अनुष्टुप्-वृहति-प्रस्तार-पंक्ति-छन्दोभ्यो नमः मुखे। श्रीमहालक्ष्मी देवताय नमः हृदि। श्रीमहा-लक्ष्मी-प्रसाद-सिद्धयर्थे राज-वश्यार्थे सर्व-स्त्री-पुरुष-वश्यार्थे महा-मन्त्र-जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे।
कर-न्यासः-
ॐ हिरण्मय्यै अंगुष्ठाभ्यां नमः। ॐ चन्द्रायै तर्जनीभ्यां स्वाहा। ॐ रजत-स्त्रजायै मध्यमाभ्यां वषट्। ॐ हिरण्य-स्त्रजायै अनामिकाभ्यां हुं। ॐ हिरण्य-स्त्रक्षायै कनिष्ठिकाभ्यां वौषट्। ॐ हिरण्य-वर्णायै [...]

विद्या-प्राप्ति-प्रयोग

विद्या-प्राप्ति-प्रयोग
१॰ “ॐ ह्रीं क्लीं वद-वद वाग्वादिनी-भगवती-सरस्वति, मम जिह्वाग्रे वासं कुरु कुरु स्वाहा।”
२॰ “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं वाग्वादिनी-देवी सरस्वति, मम जिह्वाग्रे वासं कुरु कुरु स्वाहा।”
विधिः- प्रति-दिन प्रातःकाल उक्त मन्त्र का १०८ बार जप करे। बालकों को छोटी उम्र से इस मन्त्र का जप कराए। परिक्षा, नौकरी में तो इस मन्त्र के जप के द्वारा सफलता प्राप्त [...]

श्रीविचित्र-वीर-हनुमन्-माला-मन्त्र

श्रीविचित्र-वीर-हनुमन्-माला-मन्त्र
प्रस्तुत ‘विचित्र-वीर-हनुमन्-माला-मन्त्र’ दिव्य प्रभाव से परिपूर्ण है। इससे सभी प्रकार की बाधा, पीड़ा, दुःख का निवारण हो जाता है। शत्रु-विजय हेतु यह अनुपम अमोघ शस्त्र है। पहले प्रतिदिन इस माला मन्त्र के ११०० पाठ १० दिनों तक कर, दशांश गुग्गुल से ‘हवन’ करके सिद्ध कर ले। फिर आवश्यकतानुसार एक बार पाठ करने पर ‘श्रीहनुमानजी’ रक्षा [...]

कलश एवं जयन्ती का माहात्म्य

कलश एवं जयन्ती का माहात्म्य
माँ दुर्गा की पूजा का शुभारम्भ ‘कलश’-स्थापना से होता है। स्थापना हेतु ‘कलश’ स्वर्ण, चाँदी, पीतल, ताम्र अथवा मिट्टी का होना चाहिए। ‘कलश’ देखने में सुडौल और पवित्र होने चाहिए। मिट्टी के ऐसे ‘कलश’ प्रयोग में नहीं लाने चाहिए, जिनमें छिद्र होने की सम्भावना हो।विशेष अनुष्ठान करना हो, तो धातु के [...]

रुप-सप्त-श्लोकी चण्डी

सर्वाभीष्ट-दायक
रुप-सप्त-श्लोकी चण्डी
संकल्पः-
ॐ तत्सत् अद्यैतस्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय-प्रहरार्द्धे श्वेत-वराह-कल्पे जम्बू-द्वीपे भरत-खण्डे आर्यावर्त्त-देशे अमुक-पुण्य-क्षेत्रे कलि युगे कलि-प्रथम-चरणे अमुक-संवत्सरे अमुक-मासे अमुक-पक्षे अमुक-तिथौ अमुक-वासरे अमुक-गोत्रोत्पन्नो अमुक-नाम-शर्मा (वर्मा-गुप्तो-दासो वाऽहं) श्रीमहा-काली-महा-लक्ष्मी-महा-सरस्वती-देवता-प्रीति-पूर्वक सर्वाभीष्ट-सिद्धयर्थं रुपं देहीति संयोज्य नवार्ण-मनुना सह सप्त-श्लोकी चण्डी-मन्त्रस्य अमुक-संख्यक-जपं करिष्यामि।
ध्यानः-
ॐ विद्युद्-दाम-सम-प्रभां मृग-पति-स्कन्ध-स्थितां भीषणाम्,
कन्याभिः करवाल-खेट-विलसद्-हस्ताभिरासेविताम्।
हस्तैश्चक्र-गदाऽसि-खेट-विशिखाँश्चापं गुणं तर्जनीम्,
विभ्राणामनलात्मिकां शशि-धरां दुर्गां त्रिनेत्रां भजे।।
मानस-पूजनः-
उक्त प्रकार ‘ध्यान’ करने के बाद माँ दुर्गा का मानसिक पूजन करे-
ॐ [...]

सर्वाभीष्टप्रद-प्रयोग

सर्वाभीष्टप्रद-प्रयोग
‘कुमारी-पूजन’ का प्रस्तुत प्रयोग अनुभूत सिद्ध प्रयोग है। सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्णता इस ‘प्रयोग’ द्वारा सम्भव है।
१॰ पहले संकल्प करे। यथा- ॐ तत् सत्। अद्यैतस्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय प्रहरार्धे, श्री श्वेत-वाराह-कल्पे, जम्बु-द्वीपे, भरत-खण्डे, अमुक-प्रदेशान्तर्गते, अमुक पुण्य-क्षेत्रे, कलियुगे, कलि-प्रथम-चरणे, अमुक-नाम-सम्वत्सरे, अमुक-मासे, अमुक-पक्षे, अमुक-तिथौ, अमुक-वासरे, अमुक-गोत्रोत्पन्नो, अमुक-नाम-शर्माऽहं (वर्माऽहं, दासोऽहं वा), सर्वापत् शान्ति-पूर्वक ममाभीष्ट-सिद्धये, गणेश-वटुकादि-सहितां कुमारी-पूजां करिष्ये।
२॰ [...]