गौतम केवली महाविद्या

गौतम केवली महाविद्या

१११ ११२ ११३ १२१ १२२ १२३ १३१ १३२ १३३
२११ २१२ २१३ २२१ २२२ २२३ २३१ २३२ २३३
३११ ३१२ ३१३ ३२१ ३२२ ३२३ ३३१ ३३२ ३३३

अंक शकुनावली कोष्ठक से उत्तर जानने से पूर्व शुद्ध एवं पवित्र होकर अपने इष्ट देव का स्मरण करने के उपरान्त अंक शकुनावली के किसी एक कोष्ठक पर अपनी अंगुली अथवा शलाका रखें। कोष्ठक में अंकित संख्या के अनुसार अपने अभीष्ट प्रश्न का हल नीचे दिये गये अंकों से जानने का प्रयास करें।

१११॰ आपने जो प्रश्न विचारा है वह सफल होगा। तुम्हारे खराब दिनों का नाश होकर अच्छे दिन आए हैं। मन की कामनाएँ पूर्ण होंगी। विविध प्रकार की चिंताएँ मन में रहती हैं, वे अब थोड़े दिनों में नाश हो जाएँगी। एक मित्र के धोखे को भोग रहे हो। धर्म कार्य की इच्छा है, परन्तु पापकर्म से विघ्न आता है। आमदनी से खर्च अधिक रहता है। कोई कार्य सिद्ध होने को आता है, तो शत्रु उसमें विघ्न डाल देते हैं। दान-पुण्य करो। जिससे मन की अभिलाषा पूर्ण होगी। विरोधी चाहे कितनी कोशिश करें, परन्तु तुम्हारी धारणा अवश्य फलीभूत होगी।
११२॰ आपका अभीष्ट प्रश्न लाभदायक है। धन की प्राप्ति होगी। भाग्योदय के दिन अब नजदीक आ गए हैं। जिस कार्य को हाथ में लोगे, उसमें जय प्राप्त करोगे। प्रियजन का मिलाप होगा। धर्म के कार्य करते रहो, जिससे पुण्य की प्राप्ति होगी तथा सुख भी मिलेगा। मन चिन्तित रहता है। भाइयों से जुदाई होगी। मकान बनाने का इरादा करते हो वह पार पड़ेगा। जमीन से तुमको लाभ होगा। आमदनी से खर्च अधिक होता है। तीर्थों की यात्रा करने की अभिलाषा है, वह पूर्ण होगी। धार्मिक कार्य सम्पन्न होगा।
११३॰ आपका अभीष्ट प्रश्न अच्छा है। तुम्हारे दिल को आराम मिलेगा। सुख-चैन प्राप्त करोगे। जो कार्य मन में सोचा है, उसमें विजय प्राप्त करोगे। प्रियजनों का मिलाप होगा। चिन्ता के दिन निकल चुके हैं तथा अब अच्छे दिन आए हैं। धर्म के प्रभाव से सुखी हुए हो तथा आगे भी सुख प्राप्त करोगे। कष्ट सहन करते हुए भी दूसरे का कार्य करते हो परन्तु अपने कार्य में सुस्ती रखते हो। बुद्धि तेज है, बिगड़े कार्य को भी सुधार लेते हो। भविष्य में लाभ मिलेगा।
१२१॰ आपका विचारा हुआ प्रश्न लाभदायक है। बहुत दिनों तक दुःख सहन करने से निराश हो गए हो, बुरे दिन निकल गए हैं और अब शुभ दिन आए हैं। मन की इच्छाएँ फलीभूत होंगी। जितनी लक्ष्मी गंवाई है उससे भी अधिक प्राप्त करोगे। जिस काम की चिन्ता करते हो वह चिन्ता मिट जायेगी, उसमें एक व्यक्ति विघ्न उपस्थित करने आयेगा, किन्तु अन्त में तुमको सफलता प्राप्त होगी। भाइयों तथा सम्बन्धियों का निभाव करते हो, जिससे तुम्हारी कीर्ति बढ़ी है। दिल के उदार हो, जहाँ जाते हो वहाँ सुख मिलता है।
१२२॰ आपने जो काम विचारा है, उसमें सफलता नहीं मिल पाएगी। आपने आज तक बहुतों का भला किया है। अशुभ कर्म के उदय से विघ्न उपस्थित होते हैं। जहाँ तक बन सके वहाँ तक धर्म करो। अपने इष्टदेव की यथाशक्ति आराधना तथा मन्त्र का जप करो, जिससे तकलीफ दूर होगी।
१२३॰ आपके अभीष्ट कार्य में सफलता अवश्य मिलेगी। इतने पापकर्म के थे तथा आपने महान संकट उठाये हैं। अब शुभ दिन आए हैं। बहुतों का भला किया, किन्तु उन्होनें उपकार न माना। धर्म के निमित्त का निकाला हुआ पैसा घर में न रखो। तीर्थों की यात्रा करो, जिस स्थान पर दुःखी हुए हो, उस स्थान का त्याग करो, दूसरे स्थान में जाकर रहो। परदेश में लाभ होगा। तुम्हारा दिल चिन्ता में डूबा रहता है। अब शुभ कर्म का उदय हुआ है। विचारे हुए कार्य में सफलता एवं धन प्राप्त होगा।
१३१॰ जो बात आपने सोची है वह अवश्य सिद्ध होगी, जिसका नुकसान हुआ है वह दूर होकर भविष्य में लाभ होगा। धन मिलेगा। तुम्हारे हाथ से धर्म के कार्य होंगे। जिस मनुष्य से मुलाकात चाहते हो वह होगी। चिन्ता के दिन अब गए हैं। धातु, धन, सम्पत्ति और कुटुम्ब की वृद्धि होगी।
१३२॰ आज तक तुम्हारे बड़े-बड़े दुश्मन हुए अब उनका जोर नहीं चलेगा। मन में विचारे हुए कार्यों में सफलता प्राप्त करोगे। इज्जत में वृद्धि होगी। तुम्हारे हाथों से धर्म के कार्य होंगे, मन वांछित सुख की प्राप्ति होगी। भाइयों का मिलाप होगा। दान-पुण्य के प्रभाव से सुखी होंगे।
१३३॰ इतने दिन संकट रहा। चिंतित कार्य अच्छी तरह से पार न पड़ा, अब अच्छे दिनों की शुरुआत हुई है, जो कार्य विचारा है वह फलीभूत होगा, किसी भी प्रकार का विघ्न नहीं आयेगा। इष्टदेव के प्रभाव से लक्ष्मी प्राप्त होगी, प्रियजन से अचानक लाभ होगा।
२११॰ तुमने मन में जिस कार्य का विचार किया है, वह सफल नहीं होगा। इसके सिवाय कोई दूसरा काम करो। तीर्थों की यात्रा करो, जिससे पुण्य का लाभ हो। दुश्मन लोग तुमको बाधाएँ डालते हैं।
२१२॰ विचारा हुआ कार्य होगा। प्रेमिका से लाभ होगा। कुटुम्ब की वृद्धि होगी। बहुत मुद्दत से विचारा हुआ कार्य होगा। दुश्मन तुम्हारे विरुद्ध कोशिश करेंगे, किन्तु तुम्हारे सद्भाग्य के आगे उनका जोर नहीं चलेगा। तीर्थों की यात्रा करने की इच्छा है वह हो सकेगी। मकान बनाने का तथा जमीन खरीदने का तुम्हारा इरादा सफल होगा। तुमको जमीन से लाभ है। भाग्यबल से कार्य सिद्ध होंगे।
२१३॰ दुःख के दिन अब दूर हो गए हैं। सुख के दिन शुरु हुए हैं। बहुत दिनों से कष्ट उठा रहे हो, परदेश गए तो भी सुख की प्राप्ति न हुई, किन्तु अब सुख भोगने के दिन प्राप्त हुए हैं। आबरु बढ़ेगी, संतान का सुख होगा। इतने दिनों मित्रों तथा कुटुम्बी जनों की तरफ से दुःख सहन किया। जहाँ तक बना दूसरों का भला किया, परन्तु उन लोगों ने गुण नहीं माना। शत्रु लोग पग-पग पर तैयार रहते हैं, किन्तु उनका जोर नहीं चलता क्योंकि तुम्हारा भाग्य बलवान् है। पास में धन थोड़ा है, किन्तु इज्जत अच्छी है, इसलिये जितना प्राप्त करने का विचार करोगे उतना प्राप्त कर सकोगे। मित्र लोगों से जैसा चाहिए वैसा सुख नहीं है। इज्जत आबरु के लिये खर्च बहुत करते हो। तुम्हारा धर्म सुधरा हुआ है, इसलिए धर्म पर श्रद्धा रखो।
२२१॰ इतने दिन गए वे अच्छे गए, जो जो कार्य किए वे भी पार पड़ गए, किन्तु अब जो कार्य दिल में विचारा है वह पाप कर्म के उदय से पूर्ण नहीं होगा। मित्र लोग भी शत्रु हो जाएँगे। कुटुम्ब में अनबन रहेगी, भाई जुदा होंगे। जो काम दिल में विचारा है, उसका त्याग करना ही श्रेष्ठ है। धर्म पर श्रद्धा रखो, इष्टदेव की सेवा करो, दान-पुण्य के प्रभाव से सुख मिलेगा।
२२२॰ जो काम मन में विचारा है, उसको छोड़कर दूसरा काम करो। यदि इस विचारे हुए कार्य को करोगे तो संकट उत्पन्न होगा, नुकसान होगा, शत्रु लोग विघ्न उपस्थित करेंगे। इष्टदेव की सेवा करो, तीर्थों पर जाओ, जिससे दूसरे कार्य भी सुधरेंगे। दिल में विविध प्रकार की चिन्ताओं ने वास किया है, वह विचारे हुए कार्य को छोड़ देने से दूर होगी।
२२३॰ यह सवाल अच्छा है, सुख के दिन नजदीक आए हैं। व्यापार से धन प्राप्त होगा, ऐशो-आराम प्राप्त करोगे। पत्नी का सुख प्राप्त करोगे तथा संतान की वृद्धिहोगी, जो कार्य करोगे उसमें लाभ प्राप्त करोगे। ईमानदारी से काम करते हो तो अन्त में भला ही होगा। धर्म के प्रभाव से सुखी होंगे, इसलिये धर्म को भूलना मत, धर्म के कार्यों में सुस्ती रखना ठीक नहीं।
२३१॰ जिस कार्य के लिए मन में विचार किया है, वह कार्य तीन मास में होगा। अपनी स्त्री की तरफ से लाभ होगा। आज तक कुटुम्बीजनों की तरफ से सुख नही मिला, किन्तु भविष्य में मिलेगा। संतानों की वृद्धि होगी। ससुराल के खर्च की चिन्ता है, सो मिट जाएगी। आबरु के लिए आमदनी से खर्च अधिक करना पड़ता है। तीर्थों की यात्रा करने का इरादा है, किन्तु विघ्न आता है। भविष्य में धर्म कार्य कर सकोगे। हृदय में जिस कार्य की चिन्ता है, वह धर्म के प्रभाव से दूर हो जाएगी, इसलिए धर्म पर श्रद्धा रखो, जिससे सफलता प्राप्त कर सकोगे।
२३२॰ जो काम विचारा है, उसे छोड़कर कोई दूसरा काम करो। विचारे हुए कार्य को करने में लाभ नहीं है, यदि करोगे तो तुमको तुम्हारा स्थान छोड़कर दूसरे स्थान पर जाना पड़ेगा, कुटुम्बीजनों का वियोग होगा। इसलिए उचित है कि इस कार्य को छोड़ दो। धर्म में होशियार रहना तथा अपनी शक्ति के अनुसार दान-पुण्य करना जिससे सुख हो।
२३३॰ थोड़े दिनों में धन मिलेगा। जो काम विचारा है, वह पूर्ण होगा। प्रियजनों से मिलाप होगा। जमीन, जागीर अथवा मकान से लाभ होगा। आबरु बढ़ेगी। धर्म कार्यों में खर्च करो। उसके प्रताप से सुख-चैन रहेगा। राज्यपक्ष से लाभ होगा। मन की धारणा पूर्ण होगी। स्त्री की तरफ से सुख है। एक समय अकस्मात् लाभ मिलेगा।
३११॰ यह सवाल बहुत ही गरम है। जिस कार्य का विचार किया है, वह पूर्ण होगा। मुकदमा जीत जाओगे, व्यापार रोजगार में लाभ होगा। कीर्ति बढ़ेगी, राज्य की तरफ से लाभ होगा। धर्म के प्रभाव से सुख मिला है तथा भविष्य में भी मिलेगा। दूसरों के कार्य परिश्रम से पूरा करते हो, किन्तु अशुभ कर्म उदित होने से अपने कर्म में उदासीन रहते हो, विदेश यात्रा होगी और वहाँ लाभ होगा। धर्म पर श्रद्धा रखो जिससे संकट दूर हों। अपने हाथ से लक्ष्मी प्राप्त करोगे।
३१२॰ जो कार्य विचारा है उसे छोड़कर कोई दूसरा काम करो अन्यथा शत्रु लोग विघ्न डालेंगे, दौलत की खराबी होगी, घर के मनुष्यों तथा पशुओं पर संकट आएगा, इसलिए विचारे हुए कार्य को छोड़ देना ही उचित है। धर्म के प्रभाव से सब कार्य सफल होते हैं। निराश्रितों को आश्रय दो तथा देवाधिदेव का स्मरण करो जिससे सुखी होंगे।
३१३॰ यह प्रश्न अच्छा है। धन तथा स्त्री से सहयोग एवं सुख मिलेगा। संतान से सुख मिलेगा। संतान होगी, प्रियजन का मिलाप होगा। अमुक मुद्दत की धारी हुई धारणा सफल होगी। चिन्ता के दिन अब दूर हुए हैं। देव गुरु तथा धर्म की सेवा करो। दुश्मन लोग सताते हैं, किन्तु अब तुम्हारा प्रारब्ध बलवान् बना है जिससे इन लोगों का जोर नहीं चलेगा। जमीन से लाभ होगा। कीर्ति के लिए खर्च अधिक करना पड़ता है। मित्रों से लाभ होगा।
३२१॰ जमीन, मकान अथवा बाग-बगीचे से लाभ होगा। धन प्राप्त करोगे, स्नेही जन से मिलाप होगा। किसी भी मनुष्य के साथ मित्रता होगी और उसके द्वारा धनादि की प्राप्ति होगी। पुण्य के उदय से इच्छाएँ परीपूर्ण होगी। धर्म का आराधन करो। दुश्मन लोग पग-पग पर तैयार रहेंगे, किन्तु सन्मुख होने से उनका जोर नहीं चलेगा। अपनी शक्ति के अनुसार खर्च करो। मकान बनाने के मनोरथ फलीभूत होंगे। धन पैदा करते हो, किन्तु खर्च अधिक होने से इकट्ठा नहीं होता है, पिता से धन थोड़ा मिलेगा। स्त्री की तरफ से लाभ होगा। वृद्धावस्था में धर्म के कार्य बन सकते हैं।
३२२॰ जो कार्य आपने मन में विचारा है, उसमे शत्रु लोग विघ्न डालेंगे, परिणाम अच्छा नहीं। राज्य की तरफ से नाराजगी होगी यदि सुखी होना चाहते हो, तो विचारा हुआ कार्य छोड़कर दूसरा कार्य करो, तुम्हारे सहयोगी बदल गए हैं, उनका विश्वास मत करना। भजन-पूजन, व्रत-नियम में ध्यान दो।
३२३॰ जिस कार्य का मन में विचार किया है, उसमें लाभ होगा, इच्छा पूर्ण होगी, स्नेही का मिलाप होगा, जो जो चिन्ताएँ उपस्थित हुई हैं, वे सब दूर होंगी। धर्म के कार्य बन सकेंगे। बहुत दिनों से परदेश में दुःख प्राप्त किया है, किन्तु अब दुःख के दिन गए। तीर्थयात्रा होगी। अब देश में जाकर आनन्द प्राप्त करोगे। धर्म के कार्यों में लक्ष्य रखो, जिससे सब सुख प्राप्त करोगे।
३३१॰ तुम्हारे मन की चिन्ता मिटेगी। बीमारी की फरियाद दूर होगी। मन की धारणा पूर्ण होगी। थोड़े दिनों में ही धन की प्राप्ति होगी। स्नेही का मिलाप होगा। धर्म-कर्म में पैसा खर्च करो, जिससे परिणाम में फायदा होगा। अच्छे दिन आए हैं, पापकर्म से इतने दिन दुःख प्राप्त किया है, परन्तु अब वे बीत गए हैं।
३३२॰ बुरे दिन गए अब अच्छे दिन आए हैं। जमीन तथा धन-दौलत में जो हानि हुई है, वह मिट जाएगी तथा भविष्य में लाभ होगा। परमेश्वर का ध्यान करो। हृदय शुद्ध है, जिससे मन की चिन्ता जल्दी दूर होगी। परदेश में रहे मनुष्य की चिन्ता है सो उसका मिलाप होगा। धर्म के प्रभाव से सुखी होंगे।
३३३॰ इतने दिन निर्धन अवस्था में व्यतीत किए, किन्तु अब धन प्राप्त होगा तथा मन की धारणा फलीभूत होगी। जीवनसाथी से सुख प्राप्त होगा, तीन महिने बाद अच्छे दिन आएँगे। इष्टदेव की आराधना करो। आमदनी से खर्च अधिक है, धन इकट्ठा किया नहीं, मित्र की तरफ से धोखा मिला है, दुश्मन लोग पीछे से निन्दा करते हैं, किन्तु सामने आकर बोल नहीं सकते। जमीन से लाभ होगा। परमेश्वर का जप करो।

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